देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों को धार्मिक शिक्षा प्रदान करने के लिए शैक्षिक सत्र 2026-27 से नई मान्यता लेना अनिवार्य होगा। यह मान्यता राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा दी जाएगी। इसके लिए शर्त रखी गई है कि मदरसों को प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम के अनुसार ही धार्मिक शिक्षा पढ़ानी होगी।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 में स्पष्ट किया गया है कि राज्य में मान्यता प्राप्त मदरसा केवल शैक्षिक सत्र 2025-26 के अंत तक ही शिक्षा प्रदान कर सकेगा। इसके बाद किसी भी मदरसे को धार्मिक शिक्षा जारी रखने के लिए फिर से प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी।
विधेयक में यह भी कहा गया है कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के रूप में मान्यता के लिए आवेदन करने पर प्राधिकरण को यह अधिकार होगा कि वह आवेदन को मंजूरी दे या धारा 14 में वर्णित आवश्यक शर्तों के आधार पर इसे अस्वीकार कर दे।
प्राधिकरण ने बताया कि मदरसों के लिए धार्मिक शिक्षा का कोर्स तैयार किया जा रहा है, और इस कोर्स को पढ़ाने के साथ-साथ अन्य निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर ही नए सिरे से मान्यता दी जाएगी।
– डॉ. सुजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष, राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण