ग्रेटर नोएडा में श्रमिक हिंसा से जुड़े मामले में जेल में बंद आरोपित आकृति चौधरी और सृष्टि गुप्ता की जमानत याचिका पर गुरुवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई नहीं हो सकी। पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपितों के खिलाफ दर्ज धाराओं में हाल ही में संशोधन और बढ़ोतरी की गई है, जिसके चलते सुनवाई टालनी पड़ी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को तय की गई है।
इसी दौरान अदालत ने एक अन्य आदेश में तीन अलग-अलग मामलों में जेल में बंद तीन आरोपितों को पूछताछ के लिए तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दे दी है। यह रिमांड शुक्रवार सुबह 9 बजे से 26 अप्रैल शाम 6 बजे तक प्रभावी रहेगी।
आकृति चौधरी के अधिवक्ता रजनीश यादव ने बताया कि जमानत याचिका पर अब 27 अप्रैल को सुनवाई होगी। वहीं नोएडा फेज-2 कोतवाली में दर्ज मामले में पुलिस ने आकृति चौधरी, सृष्टि गुप्ता और मनीषा चौहान की सात दिन की रिमांड की मांग की थी, ताकि मामले की गहराई से जांच की जा सके।
पुलिस ने अदालत में दलील दी कि मामले से जुड़े कई अहम साक्ष्य अभी सामने आने बाकी हैं, जिन्हें आरोपितों से पूछताछ और उनकी निशानदेही पर ही हासिल किया जा सकता है। जांच अधिकारियों के अनुसार मोबाइल फोन, डिजिटल चैट, सोशल मीडिया गतिविधियां और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड इस पूरे प्रकरण को जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
रिमांड के दौरान पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों को खंगालेगी और संदिग्ध लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ करेगी। पुलिस को संदेह है कि इस मामले में किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका हो सकती है, जिसने आंदोलन को हिंसक रूप देने की साजिश रची। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
वहीं, बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई को लेकर आरोपितों के परिजनों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है। उनका कहना है कि मामले से जुड़ी जानकारी सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में उपलब्ध है, जहां से इसे प्राप्त किया जा सकता है।