नोएडा में श्रमिकों को हिंसा के लिए उकसाने के मामले में वांछित मुख्य आरोपी आदित्य आनंद उर्फ रस्टी को लेकर जांच में नए खुलासे सामने आए हैं। एसटीएफ ने उसे तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी केरल भागने की योजना में था और उसे वहां एक राजनीतिक दल से जुड़े कुछ लोगों की ओर से शरण देने का आश्वासन भी मिला था, हालांकि इससे पहले ही एसटीएफ ने उसे पकड़ लिया।

गिरफ्तारी के बाद जब उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेने की प्रक्रिया शुरू हुई तो अदालत में स्थिति असामान्य हो गई। जानकारी के मुताबिक, सुनवाई के दौरान दो दर्जन से अधिक अधिवक्ता पहुंचे और उन्होंने इसका विरोध किया, जिसके चलते सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद यूपी पुलिस ने तमिलनाडु प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से समन्वय कर ट्रांजिट रिमांड की अनुमति हासिल की और आरोपी को नोएडा लाया गया।

एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में आदित्य आनंद से कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि वह लंबे समय से एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा था, जो मजदूर आंदोलनों के नाम पर सक्रिय था।

जानकारी के अनुसार, आरोपी ने जमशेदपुर से बीटेक करने के बाद दिल्ली में रहकर विभिन्न छात्र संगठनों से संपर्क बनाया। बाद में वह दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू से जुड़े कई समूहों के साथ भी जुड़ गया। फरवरी महीने से ही वह नोएडा और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक असंतोष को बढ़ावा देने की साजिश रच रहा था।

जांच में यह भी सामने आया है कि अप्रैल की शुरुआत में उसके आवास पर एक बैठक हुई थी, जिसमें कई छात्र संगठनों और मजदूर संगठनों से जुड़े 30 से अधिक लोग शामिल हुए थे। इसी बैठक में कथित तौर पर आगे की रणनीति तैयार की गई थी।

एसटीएफ ने उसके घर से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है, ताकि उसके संपर्कों और नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।

इसके अलावा जांच में लखनऊ से जुड़े एक संगठन की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि यह संगठन नोएडा में श्रमिक मुद्दों को हवा देकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा था। फिलहाल एसटीएफ पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।