मेरठ। उत्तराखंड के चर्चित एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13.83 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। जांच के दायरे में आए तीन शिक्षण संस्थानों में मेरठ और उत्तराखंड के संस्थान शामिल हैं, जिनका संबंध भाजपा एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज से जोड़ा जा रहा है।
ईडी की कार्रवाई मेरठ स्थित महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की के मदरहुड इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी तथा रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (RIMS) से जुड़ी संपत्तियों पर हुई है। एजेंसी का आरोप है कि इन संस्थानों ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत फर्जी लाभार्थियों के नाम पर सरकारी धन प्राप्त कर उसका दुरुपयोग किया।
2011 से 2017 के बीच हुआ कथित फर्जीवाड़ा
ईडी के अनुसार मामला वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को दी जाने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति से जुड़ा है। आरोप है कि छात्रवृत्ति पाने के लिए ऐसे छात्रों को लाभार्थी दिखाया गया जो या तो संस्थानों में पढ़ते ही नहीं थे, या फिर पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते थे।
जांच में पाया गया कि तीनों संस्थानों ने कुल 6,208 छात्रवृत्ति दावे प्रस्तुत किए थे, जिनके आधार पर करीब 27.98 करोड़ रुपये की राशि जारी हुई। इनमें से लगभग 19.74 करोड़ रुपये सीधे संस्थानों के खातों में पहुंचे, जबकि शेष राशि छात्रों के नाम पर संचालित खातों में जमा की गई।
2,895 दावे संदिग्ध पाए गए
ईडी की जांच में कुल 2,895 छात्रवृत्ति दावे फर्जी या संदिग्ध पाए गए। इनमें बड़ी संख्या ऐसे छात्रों की थी जो कक्षाओं में उपस्थित नहीं होते थे या संस्थान में नामांकित ही नहीं थे।
जांच में सामने आई प्रमुख अनियमितताएं:
1,662 छात्र ऐसे मिले जिनका संस्थानों में नामांकन नहीं था।
668 छात्र नियमित रूप से अनुपस्थित पाए गए।
434 मामलों में डुप्लीकेट या रिकॉर्ड में न मिलने वाले छात्र शामिल थे।
84 छात्र परीक्षा में असफल रहे या परीक्षा फॉर्म तक नहीं भर पाए।
47 छात्र ऐसे पाठ्यक्रमों से जुड़े पाए गए जिनकी विश्वविद्यालय से मान्यता नहीं थी।
बैंक खातों के जरिए रकम घुमाने का आरोप
एजेंसी का दावा है कि छात्रवृत्ति राशि प्राप्त करने के बाद धन को विभिन्न सोसायटियों, ट्रस्टों और संबद्ध संस्थाओं के खातों में ट्रांसफर किया गया। कई स्तरों पर लेन-देन कर धन के स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई और बाद में इसी रकम का उपयोग संपत्तियां खरीदने तथा अन्य खर्चों में किया गया।
ईडी को यह भी संदेह है कि कुछ मामलों में छात्रों के नाम पर बैंक खाते खोलकर उनका संचालन संस्थान प्रबंधन या कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा था।
किन संपत्तियों पर हुई कार्रवाई
ईडी ने जिन 13.83 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों को कुर्क किया है, उनमें फिक्स्ड डिपॉजिट, जमीन के टुकड़े और हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र में स्थित शैक्षणिक भवन शामिल हैं।
एजेंसी के अनुसार:
महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जुड़ी लगभग 2.44 करोड़ रुपये की संपत्तियां
मदरहुड इंस्टीट्यूट से जुड़ी करीब 3.95 करोड़ रुपये की संपत्तियां
RIMS से संबंधित लगभग 7.44 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं।
जांच 2020 से जारी, यह छठा अटैचमेंट आदेश
एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच वर्ष 2020 से चल रही है। ईडी अब तक इस मामले में पांच अभियोजन शिकायतें विशेष पीएमएलए अदालत में दाखिल कर चुकी है और यह उसका छठा अस्थायी अटैचमेंट आदेश है।
क्या बोले धर्मेंद्र भारद्वाज?
भाजपा एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज ने मामले में किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत संलिप्तता से इनकार किया है। उनका कहना है कि उनका नाम बेवजह इस प्रकरण से जोड़ा जा रहा है और संबंधित संस्थानों के संचालन में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
फिलहाल ईडी मामले में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलू की जांच जारी रखे हुए है और आने वाले दिनों में अन्य व्यक्तियों व संपत्तियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।