वाराणसी। विश्वप्रसिद्ध श्री बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं और मंदिर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने मंगलवार को महत्वपूर्ण निर्णय लिए। कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि बुधवार से ठाकुरजी सीधे जगमोहन से दर्शन देंगे, जबकि मंदिर की पूर्व निर्धारित समय सारिणी का पालन अनिवार्य रहेगा।

कमेटी ने यह भी निर्णय लिया कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित फूलमालाओं से बनाई जाने वाली धूपबत्तियाँ अब लोगों के घरों में महक फैलाएँगी। वहीं, आर्टिफिशियल सजावट और गुब्बारों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। मंदिर का सजावट कार्य अब केवल प्राकृतिक फूल-पत्तियों तक सीमित रहेगा।

मुख्य बिंदु और बदलाव

  • मंदिर के अंदर सेवाधिकारी के साथ केवल पांच सहयोगी ही रहेंगे; अन्य सभी सेवायत बाहर रहेंगे।

  • श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई जाने वाली मालाएँ अब सीधे मंदिर में नहीं फेंकी जाएँगी। एक संस्था के माध्यम से उन्हें धूपबत्तियों में बदला जाएगा।

  • मंदिर की सफाई व्यवस्था देख रही संस्था पीएलएन-9 सिक्योरिटी सर्विस प्रा. लि. को जीएसटी न जमा करने के कारण हटाने का निर्णय लिया गया।

  • मोहनबाग में रखी अनुपयोगी वस्तुओं की नीलामी करने की स्वीकृति दी गई।

  • मंदिर की बहुमूल्य वस्तुएँ पंजाब नेशनल बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखी जाएँगी और सभी लेनदेन सिर्फ बैंक खातों के माध्यम से होंगे।

अध्यक्ष का बयान
बैठक की अध्यक्षता कर रहे रिटायर्ड हाईकोर्ट जज अशोक कुमार ने बताया कि मंदिर में श्रद्धालुओं के हित में यह सभी निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर समय सारिणी और नियमों का पालन करेगा, क्योंकि हाईकोर्ट ने पहले इस संबंध में दर्ज याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

बैठक में उपस्थित सदस्य
बैठक में रिटायर्ड जिला जज मुकेश मिश्रा, जिला जज विकास कुमार, सचिव डीएम चंद्र प्रकाश सिंह, नगर आयुक्त जग प्रवेश, एमवीडीए उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, राजभोग और शयनभोग समूह के सदस्य श्रीवर्धन गोस्वामी, शैलेंद्र गोस्वामी, दिनेश कुमार गोस्वामी और विजय कृष्ण गोस्वामी (बब्बू) शामिल रहे।

सेवायत और दर्शन व्यवस्था में सुधार
अब मंदिर में किसी भी श्रद्धालु को परेशानी न हो, इसके लिए केवल पांच सहयोगी सेवाधिकारी के साथ रहेंगे। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि मालाएँ और प्रसाद सुरक्षित तरीके से मंदिर प्रशासन तक पहुँच सकें।

कमेटी का मानना है कि ये नए नियम न केवल दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाएंगे, बल्कि मंदिर में अनुशासन और स्वच्छता भी सुनिश्चित करेंगे।