वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की इमारत को खतरा, ASI रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर खामियां

वृंदावन स्थित ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पास मंगलवार को एक भवन का छज्जा गिरने से नौ श्रद्धालु घायल हो गए थे, लेकिन अब सामने आई एक तकनीकी रिपोर्ट ने मंदिर की संरचना को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार मंदिर भवन स्वयं भी जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है और इसकी नींव तथा दीवारों में कई जगह दरारें देखी गई हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की जांच में यह खुलासा हुआ है कि मंदिर की छत पर अनावश्यक और अत्यधिक भार डाला गया है, जिसे तत्काल हटाने की आवश्यकता बताई गई है। यह जांच हाई पावर्ड कमेटी के निर्देश पर की गई थी।
संरचना कमजोर, नींव में गंभीर खामियां
एएसआई की तकनीकी रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर की नींव और भवन संरचना कमजोर पाई गई है। पिछले वर्ष किए गए सर्वे में भी इस तरह की आशंकाएं जताई गई थीं, लेकिन अब तक उन पर कोई ठोस मरम्मत कार्य नहीं हुआ।
मंगलवार की घटना के बाद इस रिपोर्ट की सिफारिशें फिर से चर्चा में आ गई हैं।
बेतरतीब निर्माण और भीड़ बना जोखिम
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मंदिर परिसर में कई जगह बिना योजना के लोहे की सीढ़ियां, पाइप और रॉड लगाई गई हैं। ऊपर जाने के लिए पत्थर की दीवारों में लोहे की सीढ़ियां फिट की गई हैं, जिससे संरचना पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
इसके अलावा, दर्शनार्थियों की भारी भीड़ और सीमित स्थान भी मंदिर की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है। कई जगह किए गए मरम्मत कार्यों से फर्श, दीवारें और लकड़ी के दरवाजे भी कमजोर हो रहे हैं।
ASI की प्रमुख सिफारिशें
रिपोर्ट में मंदिर की सुरक्षा के लिए कई अहम सुझाव दिए गए हैं:
- छत पर रखा अतिरिक्त भार (पानी की टंकियां, आरओ सिस्टम, भारी गर्डर) तुरंत हटाया जाए
- दरार वाले छज्जों और बालकनी को सहारा देकर सुरक्षित किया जाए
- प्रथम तल की रसोई और प्रशासनिक कार्यालय को स्थानांतरित किया जाए
- मंदिर परिसर में लोहे की संरचनाओं को व्यवस्थित किया जाए
- श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए परिक्रमा मार्गों को चौड़ा किया जाए
- विस्तृत अध्ययन के लिए IIT रुड़की और ASI की संयुक्त टीम द्वारा नया सर्वे कराया जाए
सुरक्षा पर बड़ा सवाल
मंदिर परिसर में हुई हालिया दुर्घटना और ASI की रिपोर्ट ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भवन की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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