GST कलेक्शन में 13.9% की बढ़ोतरी, जून में ₹1.94 लाख करोड़ का रिकॉर्ड

नई दिल्ली। देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन में लगातार मजबूती देखने को मिल रही है। जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार जून में कुल सकल GST संग्रह 13.9 प्रतिशत बढ़कर ₹1,94,812 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹1,71,105 करोड़ था।
सरकारी डेटा के मुताबिक जून में केंद्रीय जीएसटी (CGST) ₹37,376 करोड़, राज्य जीएसटी (SGST) ₹45,116 करोड़ और एकीकृत जीएसटी (IGST) ₹1,12,320 करोड़ रहा। इसमें आयात से प्राप्त ₹60,038 करोड़ का योगदान भी शामिल है।
GST रिफंड में भी तेज बढ़ोतरी
जून महीने में GST रिफंड में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में रिफंड 29.1 प्रतिशत बढ़कर ₹32,436 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह ₹25,121 करोड़ था।
रिफंड को समायोजित करने के बाद जून का शुद्ध GST संग्रह ₹1,62,377 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के ₹1,45,984 करोड़ की तुलना में 11.2 प्रतिशत अधिक है।
पहली तिमाही में भी मजबूत प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल GST कलेक्शन ₹6,31,699 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के ₹5,82,542 करोड़ से 8.4 प्रतिशत अधिक है।
इस दौरान सरकार ने ₹91,482 करोड़ का रिफंड जारी किया, जिसके बाद शुद्ध GST संग्रह ₹5,40,218 करोड़ रहा।
राज्यों का प्रदर्शन
जून महीने में GST संग्रह के मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, जहां ₹9,924 करोड़ का कलेक्शन दर्ज किया गया। इसके बाद गुजरात ₹4,333 करोड़, कर्नाटक ₹4,118 करोड़, तमिलनाडु ₹3,639 करोड़ और उत्तर प्रदेश ₹3,249 करोड़ के साथ शीर्ष राज्यों में शामिल रहे।
घरेलू मांग और आयात से मिला समर्थन
विशेषज्ञों के अनुसार GST संग्रह में यह वृद्धि घरेलू खपत और आयात दोनों में मजबूती को दर्शाती है। टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के पार्टनर विवेक जालान के मुताबिक, दरों में कटौती और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े प्रभावों के बावजूद घरेलू राजस्व में बढ़ोतरी बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि जून में आयात से जुड़े GST राजस्व में सालाना आधार पर तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जो औद्योगिक उत्पादन और कच्चे माल की मांग में मजबूती का संकेत है।
GST व्यवस्था के 9 वर्ष पूरे
गौरतलब है कि GST व्यवस्था को लागू हुए 9 वर्ष पूरे हो चुके हैं। 1 जुलाई 2017 को देश में GST लागू किया गया था, जिसके बाद वैट और सेल्स टैक्स जैसी कई पुरानी कर प्रणालियों को समाप्त कर एकीकृत कर व्यवस्था लागू की गई थी।
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