यूएस-इजरायल के हमले में ईरान का सबसे ऊंचा पुल B1 हुआ तबाह

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हालात और गंभीर होते नजर आ रहे हैं। जंग के 34वें दिन हुए ताजा हवाई हमलों में एक अहम बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। हमले में उस प्रमुख पुल को क्षति पहुंची, जो तेहरान और उसके पड़ोसी शहर करज के बीच मुख्य संपर्क मार्ग था। इस घटना के बाद दोनों शहरों के बीच आवाजाही प्रभावित हो गई है। स्थानीय मीडिया ने हमले की पुष्टि की है।
इस हमले में कम से कम दो लोगों की जान गई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हालांकि, अब तक बिजली, पानी या पर्यावरण से जुड़ी किसी बड़ी समस्या की जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान करज के कुछ अन्य इलाकों को भी नुकसान पहुंचा, जिससे वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जिस पुल को निशाना बनाया गया, वह ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट था। आधुनिक तकनीक से तैयार इस पुल को देश की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक माना जाता था। करीब एक किलोमीटर से अधिक लंबे इस पुल में कई खंड शामिल थे और इसे मजबूत ढांचे के साथ तैयार किया गया था। इस परियोजना पर करोड़ों डॉलर की लागत आई थी और इसे हाल ही में शुरू किया गया था, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
इसी बीच, एक और हमले में ईरान के प्रतिष्ठित ‘पाश्चर इंस्टीट्यूट’ को भी निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने आरोप लगाया कि इस हमले के पीछे अमेरिकी और इस्राइली ताकतें हैं।
पाश्चर इंस्टीट्यूट को देश का एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य और अनुसंधान केंद्र माना जाता है, जिसका इतिहास एक सदी से भी अधिक पुराना है। इस संस्थान की स्थापना 1920 में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत की गई थी और यह पूरे क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.