मुजफ्फरनगर। पुलिस ने फर्जी मेडिकल डिग्रियां बनाकर कथित डॉक्टरों को उपलब्ध कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में 15 हजार रुपये के इनामी और लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य आरोपी इमलाख उर्फ इमलाक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बिना किसी वैध योग्यता के लोगों को डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के रूप में पेश कर अस्पताल व डायग्नोस्टिक सेंटर चला रहा था। मामले की शुरुआत आईजीआरएस पोर्टल पर मिली शिकायत के बाद हुई, जिसके बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी।

जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ‘बाबा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी’ के नाम पर B.Pharma, D.Pharma और BAMS जैसी फर्जी डिग्रियां तैयार कर मोटी रकम वसूलते थे। मुख्य आरोपी इमलाख पहले भी उत्तराखंड एसटीएफ की कार्रवाई में जेल जा चुका है और उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
थाना छपार पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने बरला-बसेड़ा रोड से तीनों आरोपियों को पकड़ा। इनमें हरिद्वार के हिमालयन मेडिकेयर सेंटर संचालक वी.के. गौतम और मंसूर उलहक भी शामिल हैं।

पूछताछ में खुलासा हुआ कि वी.के. गौतम ने बिना वैध डिग्री के खुद को ‘एमएस सर्जन’ बताकर अस्पताल चला रहा था और उसने BAMS की फर्जी डिग्री के लिए 6 लाख रुपये दिए थे। वहीं, मंसूर उलहक इस पूरे नेटवर्क में बिचौलिये की भूमिका निभा रहा था।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया कि इमलाख पर हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट और धोखाधड़ी समेत 11 मामले दर्ज हैं। पुलिस ने इस कार्रवाई को बड़ी सफलता बताते हुए टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
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