गहलोत के हमलों पर सचिन पायलट खामोश, करीबी बोले- अब राष्ट्रीय मुद्दों पर ध्यान

राजस्थान की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच बयानबाजी एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि, गहलोत की ताजा टिप्पणियों के बीच सचिन पायलट खेमे ने प्रतिक्रिया देने से दूरी बनाने का फैसला किया है। पायलट के करीबी सूत्रों के मुताबिक, वह इन बयानों पर कोई पलटवार नहीं करेंगे और अपना पूरा ध्यान राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर केंद्रित रखेंगे।
सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट नीट पेपर लीक, सीबीएसई से जुड़े विवाद और महंगाई जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर केंद्र की भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वह राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार पर भी उसके अधूरे वादों को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। सरकार को सत्ता में आए ढाई साल से अधिक समय हो चुका है, लेकिन कई चुनावी वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं।
इस बीच अशोक गहलोत ने रविवार को एक बयान में 2022 की राजनीतिक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा था कि वह कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ किसी बगावत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उस समय विधायकों के बीच सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर असहमति की स्थिति थी। गहलोत ने यह भी कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष बनने की दौड़ में थे, लेकिन परिस्थितियों ने घटनाक्रम बदल दिया।
गहलोत ने 25 सितंबर 2022 की उस बैठक का भी उल्लेख किया, जिसमें कांग्रेस विधायक दल (CLP) का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका था। उनके अनुसार, कुछ विधायक बैठक में शामिल नहीं हुए और अलग समूह में एकत्र हो गए थे, जिससे राजनीतिक स्थिति असामान्य हो गई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि 2020 में हुए राजनीतिक संकट के कारण पार्टी विधायकों में पायलट के प्रति असंतोष की स्थिति बनी थी। उन्होंने कहा कि उस समय पायलट ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी, जिसका असर आगे की राजनीति पर भी पड़ा।
वहीं, 2020 के घटनाक्रम में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट द्वारा उठाए गए कदमों से राजस्थान की राजनीति में बड़ा संकट पैदा हो गया था, जिसे बाद में कांग्रेस नेतृत्व की मध्यस्थता से सुलझा लिया गया था।
गहलोत और पायलट के बीच लंबे समय से चला आ रहा यह राजनीतिक तनाव समय-समय पर फिर सामने आ जाता है। हालांकि, पायलट पहले भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर “भूलो और माफ करो” की नीति अपनाई है और वे आगे बढ़कर काम करना चाहते हैं।
सूत्रों के अनुसार, पायलट का फोकस अब संगठनात्मक जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय राजनीति पर है। 2022 के बाद उन्हें पार्टी में महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसके तहत उन्होंने विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रचार भी किया है और हाल ही में केरल में पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाई है।
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