प. बंगाल में हिंसा की लहरः चन्द्रनाथ की हत्या

लोकमत द्वारा कूड़ेदान में फेंकी ममता की बौखलाहट क्रूर हिंसक दानवी प्रवृत्ति में बदल चुकी है। चुनाव में शर्मनाक हार के पश्चात ममता पूरी तरह विक्षिप्त हो चुकी है। चुनाव में सूपड़ा साफ होने के पश्चात उसने पूरे राज्य को हिंसा, मारकाट, आगजनी का टीएमसी कार्यकताओं को संदेश दिया है। दो दिनों में हिंसा की 700 प्राथमिकी दर्ज होना तथा 1100 लोगों को हिरासत में लिया जाना यह दर्शाता है कि ममता किसी भी सीमा तक जा सकती
पश्चिम बंगाल के संभावित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के वैयक्तिक सहायक चन्द्रनाथ रथ 6 मई की रात्रि को की गई साजिशन हत्या यह दिखाती है कि ममता बनर्जी खुलकर खून खराबे पर उत्तर आई है। सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि टीएमसी के गुण्डों ने श्रीरथ की हत्या की साजिश को कामयाब करने से दो-तीन दिन पहले रेकी कर चुके थे। बाइक और कार सवार हत्यारों ने उनकी बोलेरो गाड़ी रोककर, फिर बिल्कुल नजदीक से उन पर अधाधुंध फायरिंग की।
चन्द्रनाथ की इरादत हत्या बौखलाई ममता का एक सन्देश है- सुवेंदु और भाजपा नेतृत्व को डराना। उसने दिखाने का प्रयास किया कि पराजित होने के बाद भी वह कितनी शक्तिशाली है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है किन्तु बदले की नहीं बदलाव की भावना से काम करेंगे। प. बंगाल में पहले ही 200 से अधिक भाजपा कार्यकर्ता बलिदान दे चुके हैं। चुनाव के पश्चात भी कई भाजपा कार्यकर्ता टीएमसी गुण्डों का शिकार बने हैं। मोदी जी सोचें कि क्या गुण्डों के समक्ष नतमस्तक होने या शांति की डुगडुगी बजाने से शांति स्थापित होगी। आखिर राजदंड का प्रयोग कब होगा?
गोविंद वर्मा
संपादक देहात
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