यह तो राजनीतिक पतन की पराकाष्ठा है !

अचानक ही एक राजनीतिक परिवार का बुद्धिमान, ऊर्जावान प्रतिभा सम्पन्न युवक हजारों रोते बिलखते लोगों को छोड़ कर चला गया। लाखों लोग जो राजनीति में सीधा हस्तक्षेप नहीं रखते, वे भी प्रतीक यादव के इस तरह चले जाने से अत्यन्त दुःखी है।
सबसे अधिक अफसोस मीडिया के समक्ष अखिलेश के इस वक्तव्य का है इसमें कानून क्या कहेगा, परिवार जो कहेगा, उसके अनुसार आगे करेंगे। यह टीवी पर सबने देखा कि अखिलेश सिविल अस्पताल में, फिर पोस्टमार्टम हाउस में और प्रतीक-अपर्णा के आवास पर नेता के रूप में पहुंचे, शोकग्रस्त बड़े भाई के रूप में नहीं।
अखिलेश के मुंह से निकले इन शब्दों को सुनने के बाद परिवार की आंतरिक कलह पर चेमे गोइयां शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने पोस्ट डाल कर संसार से विदा हो चुके प्रतीक पर ही व्यंग्य बाण छोड़े और कुछ अखिलेश पर छींटाकशी करने लगे! यह तो हद दर्जे की बेशर्मी है। एक ऐसा मीडिया है जो गमगीन माहौल में भी मिर्च मसाला ढूंढ़ता है। ऐसे लोगों पर लानत भेजने के अलावा और क्या किया जा सकता है। अवसाद और दुःख के क्षणों में हम प्रतीक की आत्मा की शांति के लिए प्रभु से विनती करते हैं। प्रतीक की विधवा अपर्णा एवं उनके बड़े भाई अखिलेश व मुलायम परिवार के सदस्यों को अपार पीड़ा व दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की परमपिता से प्रार्थना करते हैं। ओउम् शांतिः शांतिः शांतिः !!!
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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