पत्रकार भूल गए उदन्त मार्तण्ड की याद दिलाने वाले ठाकुर प्रसाद सिंह को

30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस पर श्रीमन् ठाकुर प्रसाद की याद शिद्दत से आ रही है।
कहने को वे उत्तर प्रदेश शासन के सूचना निदेशक थे किन्तु यथार्थ में ठेठ बनारसी हिंदी प्रेमी पत्रकार थे। वे महाराष्ट्री ब्राह्मण पत्रकार शिरोमणि बाबूराव विष्णु पराड़कर के प्रिय शिष्य थे। काशी के पत्रकार, साहित्यकार एक स्वतंत्र संग्राम काल में एक जेब में, पिस्तौल, दूसरी में गुप्त पत्र 'रणभेरी' और हाथ में हिंदी दैनिक 'आज' लेकर चलते थे। ठाकुर प्रसाद सिंह इसी ताब-ओं तेवर के शख्स थे। अधिकारी कम और पत्रकार ज्यादा।
सूचना निदेशालय में ठाकुर साहब के केबिन में साहित्यकारों, पत्रकारों का जमावड़ा रहता था। इन्हीं ठाकुर प्रसाद सिंह ने उत्तर प्रदेश में हिन्दी पत्रकार दिवस की परंपरा आरंभ की थी। उनने पूरे प्रदेश के जिला सूचना अधिकारियों को 30 मई को कार्यालय में पत्रकार सम्मेलन आयोजित करने का शासकीय,
आदेश प्रसारित किया और प्रत्येक कार्यालय के लिए उदन्त मार्तण्ड मास्ट हेड का 1 चित्र व पराड़कर जी, गणेश शंकर विद्यार्थी के बड़े चित्र भेजें। ठाकुर साहब के सूचना निदेशक रहते यह परंपरा जारी रही। बाद में पत्रकार संगठन हिंदी पत्रकारिता दिवस को अपने स्तर पर मनाने लगे।
यह देख कर कष्ट होता है कि हिंदी पत्रकारिता दिवस की शुरुआत करने वाले ठेठ हिंदी प्रेमी साहित्यकार पत्रकार ठाकुर प्रसाद सिंह को कभी भूल कर भी याद नहीं किया जाता। भूल गए कि उदन्त मार्तण्ड की याद
उन्होंने ही दिलाई थी। हम हिंदी प्रेमी पत्रकार को हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कोटि कोटि प्रणाम अर्पित करते हैं। उनकी याद हमारे हृदय पटल पर सदा अंकित रहेगी।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
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