स्मृति शेषः भाई जगवीर का चले जाना, 'देहात' की पारिवारिक क्षति

ये पंक्तियां लिखते हुए हमें असहनीय दुख एवं पीड़ा हो रही है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख किसान-मजदूर नेता, पूर्व मंत्री और राज्य सभा, लोकसभा के पूर्व सदस्य रामचंद्र विकल के बेटे जगवीर सिंह 'विकल' का परसो रात गाजियाबाद स्थित कविनगर आवास पर निधन हो गया। कल उनके पैतृक गांव बसंतपुर में हजारों लोगों ने अश्रुपूरित अंतिम विदाई दी।
भाई जगवीर जी बाबूजी की भांति सरल, सौम्य और स्नेहिल प्रकृति के सज्जन प्ररुष थे। एक प्रकार से वे बाबू जी की टू कॉपी थे। बाबूजी के उच्च पदों पर रहते और स्वयं उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य (एमएलसी) रहते वे एक सादगी पसन्द सीधे साधे किसान के रूप में जीवन बिताते थे। उन्ही की भांति परिचितों व अनजान लोगों का स्वागत सत्कार करते थे। भाई जगवीर जी से मेरा भाई जैसा नाता था। बाबूजी के जाने के बाद भी उन्होंने मुझसे स्नेहपूर्ण संबंध रखा। उनका चले जाता 'देहात परिवार' की निजी क्षति है। हमारे दुःख-सुख में सदा साथ रहते थे। उनकी कमी हमें खलती रहेगी। हम परमपिता परमात्मा से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं। शोक एवं पीड़ा की इस दुःख घड़ी में हमारी संवेदना 'विकल' परिवार के साथ है।
गोविंद वर्मा
संपादक 'देहात'
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.





















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.