अगले महीने केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा, जो न सिर्फ निवेशकों और घरेलू बाजार की दिशा तय करेगा, बल्कि विनिर्माण क्षेत्र को भी प्रोत्साहन देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में ठहराव, विदेशी निवेशकों की निकासी और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच सरकार इस बजट के जरिए घरेलू बाजार को मजबूत करने और निवेश को बढ़ावा देने पर ध्यान दे सकती है।
विनिर्माण क्षेत्र पर विशेष फोकस
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज़ के विश्लेषकों के अनुसार इस बजट में विनिर्माण क्षेत्र पर जोर रहेगा। इसका मकसद भारत पर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करना और उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा देना है। ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने और रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के बाद अब 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देने वाला कानून भी पास हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट में विनिर्माण, अवसंरचना और विनिवेश के लक्ष्यों को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हो सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित विकास को बनाए रखना जरूरी
क्रिसिल इंटेलिजेंस के वरिष्ठ अध्यक्ष जगनारायण पद्मनाभन के अनुसार, बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। इसमें लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का पूंजी व्यय शामिल होगा। सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी पर लगातार ध्यान देना जरूरी है। भारतमाला परियोजना फेज 2.0 जैसी पहल से नेशनल कॉरिडोर का विस्तार और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाई जा सकती है, साथ ही रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।
पूंजीगत व्यय में वृद्धि की संभावना
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान का कहना है कि बजट में विकास की गति और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा। उनके अनुसार अगले वित्तीय वर्ष के लिए 8-8.5 प्रतिशत विकास की उम्मीद है, जिससे पूंजीगत व्यय लगभग 12-12.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इससे बुनियादी ढांचे का विकास, नए रोजगार और निजी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा बजट में पीएलआई योजनाओं, बहुवर्षी वित्तपोषण और एआई, सेमीकंडक्टर एवं नई तकनीकों के लिए प्रोत्साहनों पर ध्यान देने की संभावना है।