पश्चिम एशिया में ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में नाटो देशों या किसी अन्य देश की मदद की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि अमेरिका ने अकेले ही ईरान के खिलाफ महत्वपूर्ण सैन्य सफलता हासिल कर ली है और वह अपने अभियान को बिना किसी सहयोग के आगे बढ़ा सकता है।

नाटो पर ट्रंप का तीखा हमला

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि नाटो के कई सहयोगी देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल नहीं होंगे। ट्रंप ने कहा कि यह उनके लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि लंबे समय से नाटो एकतरफा प्रणाली बन गया है। अमेरिका अपनी सुरक्षा और सहयोगियों की रक्षा पर अरबों डॉलर खर्च करता है, लेकिन जब जरूरत पड़ती है तो वही देश उसका साथ नहीं देते।

ट्रंप ने कहा, "मैं पहले से ही जानता था कि नाटो एक 'वन-वे स्ट्रीट' है। अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, लेकिन बदले में उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता।"

ईरान पर सैन्य कार्रवाई का दावा

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। उनके अनुसार, ईरान की नौसेना, वायुसेना और एयर डिफेंस सिस्टम लगभग नष्ट हो चुके हैं। इसके साथ ही कई सैन्य ठिकानों और रडार सिस्टम को भी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी अब सक्रिय नहीं हैं।

अमेरिका अकेले भी सक्षम

राष्ट्रपति ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश है और उसे किसी की मदद की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि नाटो के अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की सहायता के बिना भी अमेरिका अपने सैन्य अभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ा सकता है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका की हालिया सैन्य सफलता इस बात का सबूत है कि वह अपने रणनीतिक लक्ष्यों को अकेले भी पूरा कर सकता है।