नई दिल्ली। सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी 9,000 रुपये टूटकर 2,56,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। वहीं, 99.9 फीसदी शुद्ध सोना 2,950 रुपये गिरकर 1,60,250 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
चांदी और सोने में लगातार गिरावट
चांदी की कीमतों में 3.4 फीसदी की गिरावट आई, जो शुक्रवार के 2,65,500 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 2,56,500 रुपये हो गई। सोने में लगातार तीसरे दिन नुकसान दर्ज किया गया, जिसमें 1.81 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि मुनाफावसूली और निवेशकों का सुरक्षित विकल्प की मांग के कारण डॉलर और बॉन्ड की ओर रुझान बढ़ा, जिससे सोना-चांदी की कीमतें दबाव में आईं।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी हुई, जो निवेशकों को अन्य परिसंपत्तियों में पूंजी लगाने के लिए प्रेरित कर रही है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण बड़ी पोजीशन समाप्त हो रही हैं। निवेशक कीमती धातुओं से पूंजी निकालकर अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड में निवेश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी-ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक केंद्रीय बैंक ऊर्जा आपूर्ति बाधाओं की वजह से ब्याज दरों में बदलाव से बच सकते हैं।
परमार ने घरेलू बाजार में सोने और चांदी की गिरावट को वित्तीय वर्ष के अंत से पहले थकावट के संकेत के रूप में देखा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतें गिरावट में रहीं। हाजिर सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे फिसल गया, जबकि चांदी 80 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई। सोना 4,998.31 डॉलर प्रति औंस पर 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। चांदी 78.76 डॉलर प्रति औंस पर 2.25 फीसदी टूट गई।
मीराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक प्रवीण सिंह ने बताया कि मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से विदेशी बाजार में सोना लगभग 4,992 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
आगे की राह और निवेशकों की नजर
कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी कमोडिटी रिसर्च कायनात चैनवाला ने कहा कि निकट भविष्य में सर्राफा बाजार में नरमी बनी रह सकती है। बाजार की नजर आगामी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की बैठक पर टिकी है, जहां आर्थिक अनुमानों और नीतिगत संकेतों के आधार पर दिशा तय होगी।
चैनवाला ने यह भी कहा कि अमेरिकी-ईरान गतिरोध में फिलहाल कोई कमी के संकेत नहीं हैं, इसलिए भू-राजनीतिक जोखिम निकट अवधि में सोना और चांदी के मूल्य निर्धारण में मुख्य भूमिका निभाते रहेंगे।