वैश्विक व्यापारिक माहौल के बीच भारत और अमेरिका अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर तेजी से काम कर रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि दोनों देश सक्रिय रूप से वार्ता में लगे हैं और जल्द ही एक सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद निर्यात में वृद्धि
वाणिज्य सचिव ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से लगाए गए उच्च टैरिफ के बावजूद, भारतीय निर्यात में सकारात्मक वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष व्यापार वार्ता में लगे हैं और उन्हें लगता है कि एक समझौता संभव है।” विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग को दर्शाती है।
व्यापार वार्ता की गंभीरता
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की गंभीरता को इसी बात से समझा जा सकता है कि दिसंबर में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के बीच उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक हुई थी। इस बैठक का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार में मौजूद बाधाओं को दूर करना और नए रोडमैप के माध्यम से व्यापार को बढ़ावा देना था।
यह वार्ता केवल टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बाजार पहुंच, सेवा क्षेत्र के व्यापार और निवेश नियमों के सरलीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार किया जा रहा है।
संभावित प्रभाव
यदि यह समझौता लागू होता है तो इसके प्रभाव कई क्षेत्रों में दिखाई देंगे:
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एमएसएमई और लघु उद्योग: अमेरिकी बाजार तक एमएसएमई और छोटे उद्योगों की पहुंच बढ़ेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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आईटी और फार्मास्युटिकल क्षेत्र: भारतीय आईटी सेवाओं और दवा निर्यात को मजबूत समर्थन मिलेगा।
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नीतिगत स्थिरता: औपचारिक समझौता व्यापारिक नियमों में स्पष्टता लाएगा और दोनों देशों के निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ाएगा।
आगे क्या होगा
राजेश अग्रवाल ने यह भी संकेत दिया कि भारत अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अमेरिकी बाजार में मौजूद चुनौतियों को अवसर में बदलने की तैयारी कर रहा है। आगामी महीनों में होने वाली बैठकें समझौते की दिशा और आर्थिक सहयोग की रूपरेखा तय करेंगी।