केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले ही अपने कर्मचारियों को एक अहम राहत दी है। सरकार ने कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज की शुरुआत की है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों को एक ही सैलरी खाते में बैंकिंग, बीमा और लोन से जुड़ी कई सुविधाएं एक साथ मिलेंगी।

अब सैलरी अकाउंट केवल वेतन जमा होने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यही खाता बीमा सुरक्षा, स्वास्थ्य कवर और किफायती बैंकिंग सेवाओं का पूरा पैकेज बनेगा। वित्तीय सेवा विभाग ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सहयोग से इस योजना को लागू किया है, जिसे केंद्रीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा कल्याणकारी कदम माना जा रहा है।

एक खाते में बैंकिंग, बीमा और सुरक्षा

नई व्यवस्था के तहत सैलरी अकाउंट को तीन प्रमुख हिस्सों में समाहित किया गया है—बैंकिंग सेवाएं, बीमा कवर और डिजिटल सुविधाएं। इससे कर्मचारियों को अलग-अलग बीमा या वित्तीय उत्पाद लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस पैकेज में शामिल प्रमुख बीमा सुविधाएं इस प्रकार हैं—

  • हवाई दुर्घटना में 2 करोड़ रुपये तक का बीमा कवर

  • 1.5 करोड़ रुपये तक का पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस

  • स्थायी विकलांगता की स्थिति में व्यापक सुरक्षा

  • 20 लाख रुपये का इन-बिल्ट टर्म लाइफ कवर

  • कर्मचारी और उसके परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा

लोन होगा सस्ता, प्रक्रिया होगी आसान

कंपोजिट सैलरी अकाउंट के जरिए कर्मचारियों को होम लोन, वाहन लोन, शिक्षा और पर्सनल लोन पर कम ब्याज दरों का लाभ मिलेगा। प्रोसेसिंग फीस में भी रियायत दी जाएगी। इसके अलावा बैंक लॉकर के किराए में छूट जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं।

डिजिटल बैंकिंग में मिलेगा प्रीमियम अनुभव

इस नए सैलरी खाते में अकाउंट मेंटेनेंस चार्ज नहीं लगेगा और जीरो बैलेंस की बाध्यता नहीं होगी। अनलिमिटेड ट्रांजैक्शन, डेबिट-क्रेडिट कार्ड पर अतिरिक्त लाभ, रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

पुराने सैलरी खाते भी होंगे अपग्रेड

सरकार ने बैंकों को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों की सहमति से मौजूदा सैलरी अकाउंट को इस नए कंपोजिट पैकेज में बदला जाए। इसके लिए विभागों में जागरूकता अभियान और सीधे संपर्क की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे लाखों कर्मचारियों को एक साथ इसका लाभ मिल सके।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल

यह कदम दर्शाता है कि सरकार अब केवल वेतन बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कर्मचारियों को दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। विकसित भारत 2047 और इंश्योरेंस फॉर ऑल जैसे लक्ष्यों की ओर यह फैसला एक ठोस प्रयास माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की नौकरी अब सिर्फ स्थिर आय तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मजबूत बैंकिंग सुविधाओं, बड़े बीमा कवर और परिवार की आर्थिक सुरक्षा का भरोसा भी साथ लेकर आएगी।