नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी से आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि ईंधन के दाम बढ़ने से परिवहन और उत्पादन लागत में इजाफा होगा, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो यह बढ़ोतरी आगे चलकर 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।
क्रिसिल का कहना है कि ईंधन महंगा होने का असर पूरी अर्थव्यवस्था में दिखाई देगा, खासकर ढुलाई लागत बढ़ने के कारण। इससे खाद्य पदार्थों सहित कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी आने की संभावना है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यदि ईंधन कीमतों में 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि होती है, तो खुदरा महंगाई दर में लगभग 0.36 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है। वहीं, यदि यह बढ़ोतरी 10 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचती है, तो महंगाई दर में करीब 0.48 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईंधन मूल्य वृद्धि का सबसे अधिक असर सड़क परिवहन पर पड़ता है, क्योंकि इसकी कुल लागत में लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा ईंधन का होता है। भारत में करीब 71 प्रतिशत माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है, जिससे इसका प्रभाव व्यापक स्तर पर महसूस किया जाता है।
क्रिसिल ने कहा है कि ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं जैसे दूध, फल, दालें, चाय-कॉफी, मसाले, अंडे, मांस और मछली की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि ये उत्पाद बड़े पैमाने पर सप्लाई चेन पर निर्भर होते हैं।
इसके अलावा कपड़ा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, लकड़ी आधारित उत्पाद, सीमेंट और सिरेमिक जैसे उद्योगों की उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है। साथ ही रसायन, कोयला और धातु क्षेत्र भी बढ़ती लागत के दबाव से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे समग्र महंगाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।