भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) में ग्राहक शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय बैंक ने इंटरनल ओम्बड्समैन यानी आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति और उनके कार्य संचालन के लिए विस्तृत मानक तय किए हैं।
कौन-कौन सी संस्थाओं पर लागू होंगे नियम
ये निर्देश निम्नलिखित वित्तीय संस्थाओं पर लागू होंगे:
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वाणिज्यिक बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक
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पेमेंट्स बैंक और NBFCs
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गैर-बैंक प्रीपेड भुगतान उपकरण (PPI) जारीकर्ता
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क्रेडिट सूचना कंपनियां (CICs)
योग्यता और अनुभव की शर्तें
आरबीआई ने इंटरनल ओम्बड्समैन की नियुक्ति के लिए कड़े मानक निर्धारित किए हैं। प्रत्येक विनियमित संस्था को कम से कम एक ओम्बड्समैन नियुक्त करना अनिवार्य होगा।
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पद का स्तर: सेवानिवृत्त या सेवारत अधिकारी, जिसका पद संबंधित संस्था के ‘जनरल मैनेजर’ के समकक्ष हो।
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अनुभव: बैंकिंग, गैर-बैंक वित्त, विनियमन, पर्यवेक्षण, भुगतान व निपटान प्रणाली, क्रेडिट सूचना या उपभोक्ता संरक्षण में कम से कम सात साल का अनुभव।
सिस्टम कैसे काम करेगा
इंटरनल ओम्बड्समैन सीधे ग्राहकों से शिकायतें नहीं लेंगे। उनका मुख्य कार्य उन शिकायतों का समाधान करना है जो पहले संस्था द्वारा जांची गई हैं, लेकिन या तो आंशिक रूप से हल हुई हैं या पूरी तरह खारिज कर दी गई हैं। यह पद संस्था के भीतर शीर्ष-स्तरीय समीक्षा प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा।
आरबीआई की निगरानी
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी भारतीय रिजर्व बैंक के पर्यवेक्षण विभाग द्वारा की जाएगी। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि सभी संस्थाएं इन दिशा-निर्देशों का पालन कर रही हैं और ग्राहक शिकायत निवारण प्रभावी रूप से हो।
आरबीआई का यह कदम वित्तीय प्रणाली में ग्राहकों के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे शिकायतों का समाधान तेजी से होगा और ग्राहकों को बार-बार बाहरी मंचों की ओर नहीं देखना पड़ेगा।