नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव के साथ गिरावट जारी रही। निवेशक जोखिम से बचते दिखे, जिससे प्री-ओपनिंग में सेंसेक्स 2,300 अंक तक लुढ़क गया। बाजार खुलने के बाद 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,857.34 अंक या 2.35% गिरकर 77,061.56 पर कारोबार करने लगा। वहीं, निफ्टी 50 भी 519.50 अंक या 2.12% टूटकर 23,930.95 पर आ गया। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 92.25 पर रहा।

तेल की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार वृद्धि हुई। निवेशकों को आशंका है कि होरमुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जो दुनिया के प्रमुख तेल मार्गों में से एक है।

  • ब्रेंट क्रूड 20% से अधिक बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

  • यह रैली जुलाई 2022 के बाद सबसे ऊँची है और कीमतों ने तीन साल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार किया।

कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव

सोने और चांदी के बाजार में भी Monday को भारी अस्थिरता रही:

  • स्पॉट गोल्ड: 2.12% गिरकर 5,049 डॉलर प्रति औंस

  • स्पॉट सिल्वर: 3.51% गिरकर 81.34 डॉलर प्रति औंस

विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक तनाव और निवेशकों द्वारा अपने पोर्टफोलियो एडजस्ट करने के कारण इन धातुओं में लगभग 3.5% तक गिरावट दर्ज की गई।

एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली

तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक जोखिम के चलते एशियाई शेयर बाजार भी दबाव में रहे:

  • जापान का निक्केई 225: 6.22% गिरकर 53,000 से नीचे

  • टॉपिक्स इंडेक्स: 5.27% लुढ़का

  • दक्षिण कोरिया का कोस्पी: 6.68% गिरावट

तेज अस्थिरता के कारण दक्षिण कोरिया में कोस्पी 200 फ्यूचर्स की ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी।

ट्रंप की टिप्पणी और बाजार की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों में हालिया उछाल को अस्थायी बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु खतरे के समाधान के बाद तेल की कीमतें गिर सकती हैं और यह वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती नहीं है।

आगे बाजार का फोकस

विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तीन प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी:

  1. पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति

  2. कच्चे तेल की कीमतों का रुख

  3. वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान

यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आती है, तो इसका असर महंगाई, ब्याज दरों और शेयर बाजारों पर और गहरा पड़ेगा।