सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन को बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। अदालत ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें अमेजन की अपील को अस्वीकार करते हुए फ्यूचर ग्रुप निवेश विवाद में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के फैसले को बरकरार रखा गया था।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान CCI के 17 दिसंबर 2021 के आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें अमेजन पर 202 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था और उसके फ्यूचर ग्रुप से जुड़े सौदे पर रोक लगाई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मामले में CCI और NCLAT दोनों के निष्कर्षों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों आदेशों को रद्द किया जाता है और निर्देश दिया कि अमेजन से वसूली गई या जमा कराई गई कोई भी राशि आठ सप्ताह के भीतर वापस की जाए।

यह फैसला अमेजन के लिए लंबे समय से चल रहे फ्यूचर ग्रुप निवेश विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत माना जा रहा है।

क्या था पूरा विवाद

यह मामला 2019 में अमेजन के फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड (FCPL) में किए गए निवेश से जुड़ा है। अमेजन ने कंपनी में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी थी, जो आगे चलकर फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) से जुड़े सौदों तक पहुंचा।

CCI ने आरोप लगाया था कि अमेजन ने सौदे की मंजूरी लेते समय कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाईं और उसके वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट नहीं किया।

CCI की कार्रवाई और जुर्माना

28 नवंबर 2019 को CCI ने इस निवेश को मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में दस्तावेजों की जांच के बाद आयोग ने माना कि अमेजन ने अपने इरादों को पूरी तरह उजागर नहीं किया। इसके आधार पर 17 दिसंबर 2021 को मंजूरी को निलंबित कर 202 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

NCLAT और आगे की कानूनी लड़ाई

CCI के फैसले को अमेजन ने NCLAT में चुनौती दी थी, लेकिन अपीलीय अधिकरण ने भी आयोग के निष्कर्षों को सही माना और जुर्माने में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब कंपनी को राहत मिली है।