पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट बैठक में आम जनता, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई। बैठक में कुल 46 एजेंडों को स्वीकृति दी गई, जिनमें राज्य के डिजिटल विकास, रोजगार और उच्च शिक्षा को मजबूत करने पर विशेष जोर रहा।
बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव सहित सभी विभागों के मंत्री मौजूद रहे। विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा के बाद उन्हें मंजूरी दी गई।
AI और डिजिटल इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने के लिए चार प्रमुख वैश्विक तकनीकी संस्थानों के साथ समझौते को मंजूरी दी है। इनमें गूगल क्लाउड इंडिया, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, सर्वम और कोरोवर शामिल हैं।
इन साझेदारियों का उद्देश्य AI तकनीक को सरकारी तंत्र और आम नागरिकों तक अधिक सुलभ बनाना तथा राज्य में आधुनिक डिजिटल ढांचा तैयार करना है।
कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में AI का उपयोग
सरकार के अनुसार AI आधारित तकनीक का उपयोग कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, पर्यटन, वित्तीय सेवाओं और लोक सेवाओं में किया जाएगा। इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
अधिकारियों और छात्रों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम
समझौतों के तहत सरकारी अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों को AI से जुड़ा विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक और मेडिकल कॉलेजों में AI आधारित पाठ्यक्रम विकसित किए जाएंगे।
शोधकर्ताओं को भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय बोलियों में अध्ययन के लिए भी तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाएगा।
बिहार के लिए स्वदेशी AI मॉडल की तैयारी
कोरोवर के सहयोग से बिहार के लिए एक स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने की योजना पर काम होगा। इसके अलावा राज्य में एप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय की स्थापना की संभावनाओं का अध्ययन भी किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य स्टार्टअप, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।
पांच नए निजी विश्वविद्यालयों को मंजूरी
कैबिनेट ने उच्च शिक्षा के विस्तार के तहत राज्य में पांच नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को भी मंजूरी दी है। इनमें मधुबनी, सिवान, नवादा, पटना और औरंगाबाद जिलों में प्रस्तावित विश्वविद्यालय शामिल हैं।
शिक्षा और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इन नए विश्वविद्यालयों के शुरू होने से छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।