अयोध्या। राम मंदिर में दानराशि गबन की जांच को लेकर चल रही एसआईटी कार्रवाई के बीच एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पद पर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र की नियुक्ति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
जांच और बयानों के बीच बढ़ी चर्चा
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी द्वारा किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को ट्रस्ट के सीईओ पद पर नियुक्त करने की सिफारिश किए जाने की बात सामने आने के बाद यह संभावना और मजबूत हो गई है। वहीं हाल के दिनों में नृपेंद्र मिश्र के सार्वजनिक बयानों ने भी इस चर्चा को और हवा दी है।
राम मंदिर परिसर में निर्माण कार्य लगभग पूर्ण होने के बाद निर्माण समिति के अध्यक्ष के पद की भूमिका सीमित होती जा रही है, ऐसे में उनके भविष्य की भूमिका को लेकर विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं।
मीडिया में दिए बयानों से बढ़ी अटकलें
दानराशि से जुड़े कथित गबन प्रकरण के सामने आने के बाद नृपेंद्र मिश्र दो बार अयोध्या पहुंचे, लेकिन मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस मामले पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की।
हालांकि, बाद में मीडिया में दिए उनके बयानों में उन्होंने दान व्यवस्था में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करते हुए इसे ‘डाका’ तक बताया। साथ ही उन्होंने ट्रस्ट स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इसी दौरान उन्होंने महासचिव चंपतराय का बचाव करते हुए उन्हें सीधे तौर पर जिम्मेदार मानने से इनकार किया।
सीईओ नियुक्ति को लेकर संभावनाएं
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी को ट्रस्ट का सीईओ बनाए जाने की संस्तुति की बात सामने आने के बाद चर्चाओं को और बल मिला है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार स्तर पर इस पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।
निर्माण समिति का कार्य लगभग पूरा होने के बाद उसका ढांचा भी धीरे-धीरे समाप्ति की ओर है, जिससे इस पद पर नई नियुक्ति की संभावना और बढ़ गई है।
अनुभव और भूमिका पर नजर
नृपेंद्र मिश्र लंबे समय से ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं। उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव और राम मंदिर परियोजना में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें इस पद के लिए एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है।