देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूहों में से एक टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की अहम बोर्ड बैठक मंगलवार को मुंबई स्थित बॉम्बे हाउस में आयोजित की गई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब समूह के शीर्ष नेतृत्व के बीच रणनीतिक फैसलों और भविष्य की दिशा को लेकर चर्चा और असहमति की खबरें सामने आ रही हैं।

बैठक में मुख्य रूप से समूह के नए व्यवसायों के वित्तीय प्रदर्शन, बढ़ते घाटे और संभावित आईपीओ (शेयर बाजार में लिस्टिंग) जैसे मुद्दों पर विचार किया गया।

शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी

इस महत्वपूर्ण बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, स्वतंत्र निदेशक हरीश मनवानी और अनीता एम. जॉर्ज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। हालांकि बैठक के बाद टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की।

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में समूह के भीतर शीर्ष स्तर पर कुछ मुद्दों को लेकर विचारों में मतभेद की स्थिति देखी गई है। इनमें नेतृत्व से जुड़े फैसले और कुछ रणनीतिक नियुक्तियों पर चर्चा शामिल रही है।

नए व्यवसायों से बढ़ता वित्तीय दबाव

बैठक में सबसे बड़ा फोकस टाटा समूह के नए और अनलिस्टेड व्यवसायों के प्रदर्शन पर रहा, जिनसे कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2025 में टाटा समूह के गैर-सूचीबद्ध व्यवसायों में लगभग 10,905 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया गया है। अनुमान है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो यह आंकड़ा आने वाले समय में बढ़कर लगभग 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

यह नुकसान मुख्य रूप से टाटा डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक्स वेंचर्स और हाल ही में अधिग्रहित एयर इंडिया जैसे नए क्षेत्रों से जुड़ा बताया जा रहा है।

आईपीओ और रणनीतिक असहमति

सूत्रों के अनुसार, टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में रहा। आरबीआई द्वारा टाटा संस को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद लिस्टिंग की आवश्यकता बनी हुई है, लेकिन इस पर सभी की राय एक समान नहीं है।

बताया जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा आईपीओ के पक्ष में नहीं हैं, जबकि कंपनी के भीतर इस विषय पर विचार-विमर्श जारी है।

भविष्य की दिशा और नेतृत्व पर नजर

बैठक के बाद यह भी संकेत मिले कि कंपनी के नेतृत्व और पुनर्नियुक्ति जैसे मुद्दों पर फिलहाल कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि समूह के भीतर चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच हाल में हुई बैठकों को रणनीतिक संवाद के तौर पर देखा जा रहा है।

आगे की चुनौती

टाटा समूह इस समय एक महत्वपूर्ण चरण से गुजर रहा है, जहां नए व्यवसायों को लाभ में लाना और नियामकीय आवश्यकताओं के साथ संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। आने वाले समय में समूह की दिशा काफी हद तक इन वित्तीय और रणनीतिक फैसलों पर निर्भर करेगी।