वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत अपनी कच्चे तेल की खरीद रणनीति में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। संकेत मिल रहे हैं कि नई दिल्ली अब रूस से आयात कम कर ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने पर विचार कर रही है। इस संदर्भ में वेनेज़ुएला से तेल खरीद को लेकर बातचीत जारी है।

भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान कहा कि भारत ऊर्जा आपूर्ति के विकल्प बढ़ाने पर काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का रुख रूस से तेल खरीद को लेकर सख्त है और यह नीति केवल भारत तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि यूक्रेन युद्ध से जुड़ी गतिविधियों पर विराम लगे और वैश्विक स्तर पर शांति की दिशा में ठोस कदम उठें।

ट्रंप का दावा, भारत की संतुलित प्रतिक्रिया

2 फरवरी, 2026 को राष्ट्रपति ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट और व्हाइट हाउस के बयान में दावा किया था कि भारत रूसी तेल की खरीद घटाने पर सहमत हो गया है। हालांकि, भारत सरकार ने इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि भारत सभी संभावित ऊर्जा स्रोतों पर विचार कर रहा है, जिनमें वेनेज़ुएला भी शामिल है।

व्यापार समझौते में टैरिफ कटौती

ऊर्जा नीति में संभावित बदलाव के साथ-साथ भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में भी प्रगति देखने को मिल रही है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही है। इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति का हिस्सा भी है। भारत द्वारा नए ऊर्जा स्रोतों की तलाश बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।