राजधानी शिमला में कांग्रेस शासित नगर निगम ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 का तीसरा बजट पेश किया। महापौर सुरेंद्र चौहान द्वारा बजट पेश करते ही नगर निगम हाउस में हंगामा शुरू हो गया। भाजपा के पार्षदों ने महापौर के कार्यकाल के विस्तार का विरोध किया और सरकार से उस नोटिफिकेशन की मांग की, जिसके तहत महापौर को कार्यकाल विस्तार दिया गया। विरोध के चलते भाजपा पार्षद सदन से वॉकआउट कर गए। इसके बाद वे उपायुक्त शिमला से मिलने पहुंचे और एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सवाल उठाया गया कि महापौर ने अपने कार्यकाल पूरा होने के बाद बजट किन अधिकारों के तहत पेश किया।
बजट में बड़े विकास और सामाजिक योजनाओं की घोषणा
महापौर सुरेंद्र चौहान ने इस अवसर पर 688 करोड़ रुपये का सरप्लस बजट पेश किया। पिछले वर्ष यह राशि 188 करोड़ रुपये थी। बजट पेश करते हुए महापौर ने शहर के लिए कई विकास और सामाजिक योजनाओं का उल्लेख किया।
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शिमला के सभी सार्वजनिक शौचालयों में महिलाओं के लिए सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएंगे।
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रिज और मॉल रोड पर माताओं और बच्चों के लिए फीडिंग रूम बनाए जाएंगे।
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शहर में 26 चिन्हित स्थानों पर फूड वैन लगाने की योजना, जिससे बेरोजगार महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार मिलेगा।
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शिमला के कोर एरिया में ई-कार्ट चलाए जाएंगे।
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हर वार्ड में नई पार्किंग सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।
महापौर ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य न केवल शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है, बल्कि रोजगार और सामाजिक सुविधाओं के जरिए आम नागरिकों के जीवन स्तर को भी सुधारना है।