आंध्र प्रदेश के चर्चित हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और राज्य पुलिस तथा सत्ता के बीच कथित गठजोड़ पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने वाईएसआरसीपी के एमएलसी अनंथा सत्य उदया भास्कर राव पर चल रहे 2022 के हत्या केस का ट्रायल 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि मामले में कोई देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सुनवाई तय समयसीमा में पूरी होनी चाहिए।

मामले का सार

अनंथा सत्य उदया भास्कर राव पर आरोप है कि उन्होंने मई 2022 में अपने पूर्व ड्राइवर वीधी सुब्रमण्यम की हत्या की थी। विवाद पैसों को लेकर काकीनाडा में हुआ था। मृतक दलित समुदाय से संबंधित था। इस मामले में हत्या और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया और राव को गिरफ्तार भी किया गया था। यह घटना उस समय की है जब राज्य में वाईएसआरसीपी की सरकार थी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड देखने पर स्पष्ट रूप से लगता है कि राज्य पुलिस आरोपी के साथ ‘हॉबनॉबिंग’ कर रही थी। कोर्ट ने इसे पुलिस और सत्ता के बीच गठजोड़ बताया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि जांच और ट्रायल में पारदर्शिता और तेजी जरूरी है।

पूर्व सुनवाई और बेल का इतिहास

सितंबर 2022 में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने राव की डिफॉल्ट बेल याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि चार्जशीट केवल तकनीकी खामियों के आधार पर अधूरी नहीं मानी जा सकती। बाद में दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी, साथ ही यह स्पष्ट किया कि आरोपी को अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश

  • राज्य हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया गया कि सुनवाई किसी वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को सौंपें, जो सप्ताह में कम से कम एक बार मामले की सुनवाई करे।

  • राज्य पुलिस को 31 मार्च 2026 तक जांच पूरी करने का आदेश।

  • ट्रायल कोर्ट को 18 अप्रैल 2026 तक आरोप तय करने का निर्देश।

  • अभियोजन पक्ष को 31 अगस्त 2026 तक गवाहों की जांच पूरी करने का समय।

  • आरोपी पक्ष को अपने बचाव साक्ष्यों के लिए दो महीने की अनुमति

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी अदालत, यहां तक कि हाईकोर्ट भी, ट्रायल रोकने वाला आदेश पारित नहीं कर सकती

  • जिला स्तर पर मामले की निगरानी सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी तय की गई।

सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि न्यायालय मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी सतर्कता बरत रहा है।