गत 29 मार्च 2026 को मेरठ जनपद के सकौती ग्राम में इतिहास पुरुष और भारत का 'प्लेटो' माने जाने वाले वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल की हितकारी किसान इंटर कॉलेज के प्रांगण में नव स्थापित प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कहावत है- 'प्रथम ग्रासे मक्षिका पात' इतने भव्य आयोजन से पहले ही पुलिस ने अनावरण से पूर्व महाराजा के नाम के साथ लिखी 'जाट' शब्दावली पट्टिका उतरवा कर दूसरी पट्टिका लगवाई। प्रशासन ने आयोजकों को सूचित किया कि किसी महापुरुष के नाम से उसकी जाति का नाम जोड़ना कानूनन अनुचित है इस लिए नाम पट्टिका दूसरी बनाई गई है, किन्तु प्रशासन की इस दलील को स्वीकारना संभव न था अतः रोष फैलना स्वाभाविक था।

प्रतिमा अनावरण के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह‌ मान को आमंत्रित किया गया था। राजस्थान से सांसद हनुमान बेनीवाल को विशिष्ट अतिथि के रूप में बुलाया गया था। इस अवसर पर पूर्व राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने खुलकर कहा कि उनका दो-दो बार अपमान किया गया है, जिसे वे भूल नहीं सकते। अपने समर्थकों से कहा कि अगर भूलने लगें तो याद दिला देना। डॉ. बालियान ने भगवंत मान एवं हनुमान बेनीवाल के 'जाट' होने की योग्यता मंच पर गिनाई किन्तु नाम पट्टिका बदलने से उत्पन्न रोष को दोनों गैर-भाजपाई नेताओं ने तुरंत झपट लिया। मान साहब बोले कि बालियान साहब! कानों में उंगली डाल लो, अब मोदी के खिलाफ बोलूंगा। और शुरू हो गये। बोले कि मोदी 9500 जनसंख्या वाले छोटे से देश (इजरायल) क्यों गया। आखिर मैं भी सीएम हूं, मुझे क्यों नहीं बताया। झगड़ा ईरान व अमेरिका में चल रहा है, मोदी ने भारत में एलपीजी और पेट्रोल पर रोक क्यों लगाई?। जब अमेरिका व इजरायल उसके दोस्त हैं तो मोदी ने पहले से पेट्रोल क्यों नहीं भरवाया। मान साहब ने और भी इसी तरह की जली-कटी बातें सुनाई। हनुमान बेनीवाल मान साहब से कम नहीं थे। मौके का लाभ उठाते हुए मोदी की बखिया उधेड़ी। अग्निवीर योजना के विरोध में नया आंदोलन चलाने की घोषणा कर दी और बात सेना की जाट रेजीमेंट तक पहुंचाने की चेतावनी भी दे दी।

जहां तक डॉ. संजीव बालियान के कथन की बात है। वे स्पष्टवादी व्यक्ति हैं, धूर्त राजनीतिज्ञों की तरह मुंह में राम, बगल में छुरी वाली आदत नहीं। सांसद तथा मंत्री के रूप में उन्होंने अपने कार्यकाल में भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में लाखों लोगों की सेवा की है। मुजफ्फरनगर व मेरठ जनपद मैं अभूतपूर्व विकास कार्य कराये हैं। इसमें दो राय नहीं कि उनके साथ धोखा किया गया। अतीत में जो कुछ हु‌आ उससे उन्हें ही नहीं, उन लाखों लोगों को पीड़ा पहुंची, जो उनके उच्च चरित्र एवं कर्मठता से परिचित हैं।

डॉ. बालियान भाजपा के कद्दावर नेता हैं जिनके लाखों समर्थक है। पार्टी नेतृत्व व दिग्गज नेताओं को उनके मन की पीड़ा जाननी, समझनी चाहिए।

एक बात समझ से परे है कि आयोजकों को क्या भगवंत मान और बेनीवाल ही अनावरण समारोह के लिए मिले थे? विवाद को जारी रखने में कई अवसरवादी लोग सक्रिय हो गये हैं। डॉ. संजीव बालियान एवं चौ. जयंत सिंह को सोशल मीडिया पर लपेटा जा रहा है। ये डॉ. बालियान या जयंत सिंह के शुभचिन्तक नहीं हैं।

इतना जरूर कहा जायेगा कि राजनीति में फूंक-फूंक कर क़दम रखने की ज़रूरत होती है। दोस्त-दुश्मन की पहचान जरूरी है।

मिर्ज़ा ग़ालिब ने सदियों पहले लिख दिया थाः 

ये फित्ना आदमी की खाना-वीरानी को क्या कम है,

हुए तुम दोस्त जिसके उसका दुश्मन आसमां क्यूं हो।।

और 

अपना नहीं ये शेवा कि आराम से बैठें,

उस दर पे नहीं बार तो काबे ही को हो आए।

की हम-नफ़सों ने असर-ए-गिर्या में तक़रीर,

अच्छे रहे आप इस से मगर मुझ को डुबो आए।।

यानी नादाँ दोस्त से जानी दुश्मन अच्छा है।

गोविंद वर्मा 

संपादक 'देहात'