तेहरान। पश्चिम एशिया में पिछले तीन महीनों से जारी तनावपूर्ण हालात अब शांत होते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते की घोषणा की गई है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों को तुरंत और स्थायी रूप से समाप्त करने पर सहमति बनी है। इस फैसले से समुद्री मार्गों से गुजरने वाले भारतीय नाविकों और व्यापारिक जहाजों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद जताई जा रही है।
इस समझौते से कुछ दिन पहले ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई को लेकर नए विवरण सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पलाऊ ध्वज वाले इस जहाज को रोकने से पहले अमेरिकी सेना की ओर से करीब 60 बार मौखिक चेतावनी दी गई थी और कई बार ताकत का प्रदर्शन भी किया गया था। जब जहाज ने निर्देशों का पालन नहीं किया, तब उस पर कार्रवाई की गई।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में जहाज के इंजन रूम को ‘प्रिसिजन म्यूनिशन’ से निशाना बनाया गया, ताकि उसे निष्क्रिय किया जा सके। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, इस जहाज पर सवार 24 भारतीय क्रू में से तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि अन्य सदस्य सुरक्षित बताए गए।
एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि कार्रवाई से पहले युद्धक विमानों ने जहाज के ऊपर उड़ान भरकर चेतावनी दी थी और फ्लेयर्स भी छोड़े गए थे। इसके अलावा जहाज को अंतिम चेतावनी देते हुए इंजन रूम खाली करने के लिए 15 मिनट का समय भी दिया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि यह कदम समुद्री नाकेबंदी को लागू करने के तहत उठाया गया था।
अमेरिकी पक्ष का दावा है कि संबंधित जहाज एक ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा था, जिसका इस्तेमाल प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए ईरानी तेल के अवैध परिवहन के लिए किया जा रहा था। बताया गया है कि पिछले कुछ हफ्तों में इस जहाज से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई थी, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी दूतावास के प्रतिनिधि को तलब कर विरोध दर्ज कराया। भारत ने तीन भारतीय नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता जताई है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंत्री से बातचीत में कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समुद्री नियमों का पालन जरूरी है।
इसी बीच अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इस समझौते के तहत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को समाप्त करने पर सहमति बनी है, जिससे पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के थमने की उम्मीद बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस डील की पुष्टि करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और सैन्य प्रतिबंधों को हटाने की बात कही है।