अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी तनाव और खाड़ी क्षेत्र में तीसरे अमेरिकी युद्धपोत की तैनाती के बीच हालात और अधिक गंभीर होते दिख रहे हैं। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को अचानक तीन देशों के दौरे पर रवाना हुए हैं। इस यात्रा का पहला पड़ाव पाकिस्तान है, जिसके बाद वे ओमान और रूस जाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस दौरे को संभावित शांति वार्ता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा है। अराघची के साथ एक छोटा प्रतिनिधिमंडल भी इस्लामाबाद पहुंच रहा है, जहां अमेरिकी लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा टीम के साथ शुरुआती बातचीत होने की संभावना है। इसके बाद एक उच्चस्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के शनिवार रात तक इस्लामाबाद पहुंचने की बात कही जा रही है।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अराघची की इस यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान के पास समझौते का एक अच्छा अवसर है, लेकिन इसके लिए उसे अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ना होगा। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी संकेत दे चुके हैं कि वह किसी जल्दबाजी में समझौता नहीं चाहते।
हालांकि, ट्रंप प्रशासन पर एक मई की समयसीमा से पहले ईरान युद्ध जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने का दबाव बढ़ रहा है। इस मुद्दे पर उनकी ही रिपब्लिकन पार्टी के कई सांसदों ने विरोध जताया है।
ईरान की शर्तें और चेतावनी
इससे पहले ईरान ने अमेरिका से विभिन्न देशों में फ्रीज की गई करीब 11 खरब डॉलर की संपत्ति को जारी करने की मांग की है। साथ ही 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी गई है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो मौजूदा युद्धविराम पर खतरा पैदा हो सकता है।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक उसकी संपत्ति जारी नहीं की जाती, तब तक होर्मुज स्ट्रेट को आंशिक या पूर्ण रूप से बंद रखा जा सकता है। पिछले 24 घंटों में इस मार्ग से केवल पांच मालवाहक जहाज ही गुजर पाए हैं।
क्षेत्रीय बातचीत और बैठकें
तीन देशों के दौरे से पहले अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार और सेना प्रमुख असीम मुनीर से बातचीत की। हालांकि ईरान ने विस्तृत जानकारी साझा नहीं की, लेकिन पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय हालात, संघर्ष विराम और अमेरिका-ईरान वार्ता को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
डार ने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए निरंतर संवाद बेहद जरूरी है। रिपोर्टों के अनुसार, इस वार्ता दल में एक छोटा ईरानी प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा, जबकि संसद प्रमुख एमबी गलीबाफ इस यात्रा में शामिल नहीं होंगे।
48 घंटे की चेतावनी और बढ़ता तनाव
अराघची ने एक वीडियो संदेश में कहा कि यदि 48 घंटे के भीतर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आता है, तो युद्धविराम टूट सकता है। उन्होंने दोहराया कि फ्रीज संपत्तियों की वापसी तक होर्मुज को बंद रखा जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिबंधों के कारण ईरान के तेल और गैस निर्यात से जुड़े अरबों डॉलर विभिन्न देशों के बैंकों में फंसे हुए हैं। यही रकम अब वार्ता का प्रमुख मुद्दा बन गई है।
ट्रंप के सामने समय की चुनौती
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान से जुड़े सैन्य फैसले को आगे बढ़ाने के लिए सीमित समय बचा है। अमेरिकी संविधान के तहत 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी जरूरी होती है, जिसकी अंतिम समयसीमा 1 मई के आसपास मानी जा रही है।
सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास बहुमत होने के बावजूद, लगभग 10 सांसदों ने ईरान युद्ध का विरोध किया है, जिससे ट्रंप की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।
खाड़ी में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ी
रॉयटर्स के अनुसार, तनाव के बीच अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए तीसरा विमानवाहक पोत भी तैनात कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने पुष्टि की कि यह 2003 के बाद पहली बार है जब तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत एक साथ इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
इस तैनाती में करीब 200 लड़ाकू विमान, युद्धपोत और हजारों नौसैनिक शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान के पास अब भी समझौते का मौका है, लेकिन इसके लिए उसे परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ना होगा।