ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत में मौजूद ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिका और पश्चिमी देशों की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता के कार्यालय के उप प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद होसैन जियाईनिया ने आरोप लगाया कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी कर रहा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं इस पर चुप्पी साधे हुए हैं।

अमेरिका पर गंभीर आरोप

जियाईनिया ने कहा कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर हमले संबंधी बयान बेहद चिंताजनक हैं। उनके अनुसार, ईरान किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम है।

उन्होंने दावा किया कि ईरान पर होने वाले संभावित हमले सीधे अमेरिकी क्षेत्र से नहीं, बल्कि आसपास स्थित सैन्य ठिकानों से संचालित होते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी देश के चारों ओर सैन्य अड्डे हों तो वह अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा।

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका पर सवाल

ईरानी अधिकारी ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि खुलेआम धमकियों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है, जो चिंता का विषय है।

ईरान की स्थिति और एकता का दावा

पश्चिमी मीडिया में चल रही आंतरिक कलह की रिपोर्टों को खारिज करते हुए जियाईनिया ने कहा कि ईरान एक संगठित गणराज्य है और किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा कि बाहरी दबावों के कारण देश में एकता और भी मजबूत हुई है और जनता अब अपनी चुनौतियों के पीछे बाहरी कारणों को समझ रही है।

नेतृत्व और अफवाहों पर प्रतिक्रिया

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के स्वास्थ्य को लेकर फैल रही अफवाहों को भी उन्होंने पूरी तरह गलत बताया। उनके अनुसार खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और ऐसी खबरें केवल भ्रम फैलाने का प्रयास हैं।

ईरान का रुख

डॉ. जियाईनिया ने कहा कि संघर्ष की शुरुआत चाहे किसी भी पक्ष से हुई हो, लेकिन उसका अंत कैसे होगा, यह निर्णय ईरान स्वयं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर किसी भी स्थिति में समझौता नहीं करेगा।