पश्चिम एशिया में पिछले एक महीने से जारी संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता की लहर पैदा कर दी है। शुरुआत से ही यह संघर्ष लगातार तीव्र और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बीच ईरान ने भी इस्राइल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच यह संघर्ष अब 30वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
इस बीच अमेरिका के कई हिस्सों में शनिवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ विशाल “नो किंग्स” प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में लाखों लोग शामिल हुए और उन्होंने महंगाई, बढ़ती जीवन लागत और ईरान के साथ जारी युद्ध के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शन देश के बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी आयोजित किए गए, जिनमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों राज्यों के लोग शामिल थे।
प्रदर्शन में लगे नारे और तख्तियां
प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, तख्तियां दिखाई और गीत-संगीत, नृत्य और मार्च के जरिए अपनी बात रखी। न्यूयॉर्क सिटी में लोग मिडटाउन मैनहैटन से मार्च कर रहे थे और आप्रवास, ट्रंप प्रशासन और ईरान संघर्ष के खिलाफ तख्तियां लिए हुए थे। वहीं सैन फ्रांसिस्को में लोग एम्बार्काडेरो प्लाजा से सिविक सेंटर की ओर बढ़े और अमेरिकी झंडे के साथ यूक्रेन संघर्ष और ट्रांसजेंडर अधिकार जैसे मुद्दों के समर्थन में बैनर भी दिखाए।
सेंट पॉल से मिनेसोटा तक रैलियों का दौर
सेंट पॉल, मिनेसोटा में भी एक बड़ी रैली आयोजित की गई, जिसमें प्रसिद्ध रॉक गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने भाग लिया। उन्होंने मिनेसोटा को पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया और जनवरी में फेडरल इमिग्रेशन एजेंट्स द्वारा मारे गए एलेक्स प्रेट्टी और रिनी गुड को श्रद्धांजलि दी। मिनेसोटा के गवर्नर टिम वाल्ज ने भी फेडरल इमिग्रेशन नीतियों की आलोचना की और स्थानीय लोगों को साहस और सामुदायिक सहयोग के लिए सराहा।
अमेरिका में “नो किंग्स” प्रदर्शन की तीसरी लहर
यह अमेरिका में “नो किंग्स” आंदोलनों की तीसरी लहर है। पिछले साल भी इसी तरह दो बड़े प्रदर्शन आयोजित किए गए थे, जिनमें लाखों लोग शामिल हुए थे। इन प्रदर्शनों के पीछे महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें और अर्थव्यवस्था में मंदी जैसी समस्याएं प्रमुख कारण रही हैं। हालांकि फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में राष्ट्रपति ट्रंप के कुछ समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच मौखिक झड़प हुई, लेकिन कुल मिलाकर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और जनता ने सरकार की नीतियों और आर्थिक मुद्दों के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त की।