अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) इन दिनों एशिया की यात्रा पर हैं. नैंसो पेलोसी मलेशिया के दौरे के बाद आज रात को ताइवान (Taiwan) पहुंच सकती हैं. अमेरिका के इस कदम के खिलाफ चीन ने एक बार फिर से धमकी दी है. चीन से अमेरिका को साफ कहा है कि वह आग से न खेले क्योंकि इसका बुरा होगा. भारत में चीनी दूतावास ने कहा है कि अमेरिका-चीन के संबंध तभी तक हैं जब तक अमेरिका 'एक चीन' की विचारधारा का सम्मान करे और ताइवान में अलगाववादी विचार को हवा न दे.
भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता वांग जियाओजिन ने एक के बाद एक ट्वीट करके अमेरिका को खुली धमकी दी है. वांग जियाओजिन ने लिखा है, 'एक चीन का सिद्धांत ही चीन-अमेरिका के रिश्तों की राजनीतिक नींव है. ताइवान की आजादी जैसे अलगाववादी विचारों का चीन सख्त विरोध करता है. साथ ही, वह इस मामले में विदेशी दखलंदाजी के भी सख्त खिलाफ है. चीन किसी भी हालत में 'ताइवान की आजादी' की बात करने वाली किसी भी ताकत को अनुमति नहीं दे सकता'.
'नैंसी की यात्रा चीन के मामलों में हस्तक्षेप'
चीन की ओर से अमेरिका को धमकाते हुए वांग ने आगे लिखा है, 'नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा को चीन के आंतरिक मामलों में खुला हस्तक्षेप माना जाएगा. इससे ताइवान जलसंधि के आसपास के इलाके में शांति और स्थिरता भंग हो सकती है. इसके अलावा, इस यात्रा की वजह से चीन और अमेरिका के रिश्तों में दरार पड़ सकती है और बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है जिसके परिणाम बुरे होंगे.'
उन्होंने आगे लिखा है, 'जनता की राय को चुनौती नहीं दी जा सकती है. जो आग से खेलते हैं वे इसी में जलकर खाक भी हो जाते हैं. अगर अमेरिका इस यात्रा को पूरी करने की जिद पर अड़ा रहता है और चीन की रेड लाइन को चुनौती देता है तो उसे इसके अंजाम भुगतने होंगे. इसके बाद होने वाली हर गतिविधि का परिणाम उसे झेलना होगा.'
'अमेरिका को भुगतना होगा अंजाम'
आपको बता दें कि चीन, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जबकि ताइवान खुद को आजाद देश कहता है. अमेरिका, चीन के खिलाफ ताइवान को हवा देना चाह रहा है और यही वजह है कि चीन ने इस पर सख्त नाराजगी जाहिर की है. इसी संबंध में पिछले हफ्ते चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से बात की थी और उनसे भी साफ कहा था कि अमेरिका, चीन-ताइवान के मामले में कोई दखल न दे.