भारत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। इसी क्रम में अमेरिका की संसद भवन कैपिटल हिल में स्थित भारतीय दूतावास मंगलवार को “द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज्म” नाम से एक विशेष डिजिटल प्रदर्शनी आयोजित करने जा रहा है। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य वैश्विक समुदाय के सामने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं और उसके प्रभावों को उजागर करना है।
पहलगाम हमले की बरसी पर आयोजन
इस कार्यक्रम का उद्घाटन अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा करेंगे। आयोजन का समय विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी के आसपास हो रहा है। यह वही हमला था, जिसे भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के संदर्भ में एक निर्णायक प्रतिक्रिया के रूप में देखा था।
इस अवसर पर भारत यह संदेश देने की कोशिश करेगा कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग और कठोर रुख अपनाना समय की आवश्यकता है, खासकर तब जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को लेकर सक्रिय प्रयास कर रहा है।
पहले भी उठाया गया है मुद्दा
यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने इस विषय को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया हो। इससे पहले भी, जब पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अध्यक्ष था, तब भारत ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इसी तरह की प्रदर्शनी आयोजित कर वैश्विक समुदाय का ध्यान आतंकवाद के मुद्दे की ओर आकर्षित किया था।
प्रदर्शनी में शामिल होंगे बड़े आतंकी हमले
यह डिजिटल प्रदर्शनी दुनिया के कई बड़े और दर्दनाक आतंकी हमलों को दर्शाएगी। इसमें 1993 का मुंबई बम विस्फोट, 2008 का मुंबई आतंकी हमला और हाल में हुआ पहलगाम हमला शामिल हैं। इसके साथ ही उन आतंकी संगठनों का भी उल्लेख किया जाएगा जिनकी भूमिका इन घटनाओं में बताई जाती है, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा जैसे नाम प्रमुख हैं।
पहलगाम हमला और उसकी पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ हमला इस प्रदर्शनी का प्रमुख संदर्भ बिंदु है। उस हमले में बैसरन घाटी में पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की गई थी, जिसमें 25 भारतीय नागरिकों और एक नेपाली नागरिक की जान चली गई थी। इस घटना को भारत ने सीमा पार आतंकवाद की गंभीर मिसाल के रूप में देखा था।