प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नौ वर्षों में दूसरी बार इजरायल पहुंचे हैं। उनके आगमन पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। वहां औपचारिक स्वागत के साथ विशेष गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने इजरायल की संसद Knesset को संबोधित किया।

नेसेट में भारत का संदेश

संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूरे भारत की ओर से वे शुभकामनाएं लेकर आए हैं। उन्होंने इसे गर्व का क्षण बताया कि वे नेसेट को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा कि इजरायल की धरती पर दोबारा आना उनके लिए विशेष खुशी का अवसर है।

7 अक्टूबर हमले पर स्पष्ट रुख

प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या अस्वीकार्य है। उन्होंने हमास का नाम लेते हुए आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश दिया और कहा कि आतंक के मुद्दे पर दुनिया को एकजुट और दोहरे मानदंडों से मुक्त रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है।

शांति और समाधान की वकालत

प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा से जुड़े शांति प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित पहल क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता दिखा सकती है। उन्होंने दोहराया कि भारत संवाद, स्थिरता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ समाधान का समर्थक है। उन्होंने कहा कि शांति का मार्ग कठिन जरूर होता है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए यही एकमात्र विकल्प है।

रणनीतिक और आर्थिक सहयोग

प्रधानमंत्री ने भारत और इजरायल को “स्वाभाविक साझेदार” बताते हुए कहा कि दोनों देश नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में अग्रणी हैं। इजरायल को उन्होंने नवाचार का केंद्र बताया, जबकि भारत को तेजी से उभरती आर्थिक शक्ति कहा। सुरक्षा सहयोग को द्विपक्षीय संबंधों की अहम कड़ी बताते हुए उन्होंने आर्थिक गलियारों और मुक्त व्यापार समझौतों की दिशा में भारत की सक्रियता का उल्लेख किया।

उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद विकास का अनोखा उदाहरण पेश किया है। साथ ही, भारत और इजरायल के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रथम विश्व युद्ध में इस क्षेत्र में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को याद किया।

संसद में गर्मजोशी भरा माहौल

प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले संसद परिसर में ‘मोदी’ के नारे सुनाई दिए। नेसेट के स्पीकर Amir Ohana ने नमस्ते कहकर उनका स्वागत किया और भारत को तेज़ी से प्रगति करने वाला देश बताया। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल के रिश्ते भरोसे और साझा मूल्यों पर आधारित हैं।

नेतन्याहू का संबोधन और ‘मोदी हग’

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने संबोधन में भारत और इजरायल को “दो प्राचीन सभ्यताएं” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश सिर्फ मित्र ही नहीं, बल्कि भाई जैसे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी व्यक्तिगत मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

नेतन्याहू ने मजाकिया अंदाज में ‘मोदी हग’ का जिक्र भी किया और कहा कि यह सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि दिल से जुड़ा अपनापन दर्शाता है। उन्होंने भारत में यहूदी समुदाय के ऐतिहासिक स्वागत को याद करते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ते यहूदी विरोध के बीच भारत एक अलग मिसाल है।

पीएम मोदी 'स्पीकर ऑफ नेसेट' मेडल से सम्मानित 

इजराइल की संसद ने भारत के प्रधानमंत्री मोदी को "नेसट अध्यक्ष पदक" से सम्मानित किया. भारतीय प्रधानमंत्री मोदी यह पदक प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति होंगे. यह कनेसट का सर्वोच्च सम्मान है. भारत और इजराइल के बीच रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत नेतृत्व के माध्यम से किए गए असाधारण योगदान को मान्यता देते हुए यह पदक प्रदान किया जा रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी उन चुनिंदा विश्व नेताओं में से हैं जिन्हें इजराइल और फिलिस्तीन दोनों देशों से सर्वोच्च पुरस्कार प्राप्त हुए हैं. 2018 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिलिस्तीन राज्य का ग्रैंड कॉलर प्रदान किया गया, जो विदेशी नेताओं के लिए सर्वोच्च फ़िलिस्तीनी सम्मान है.

यरुशलम में हुए इस कार्यक्रम ने दोनों देशों के बीच बढ़ती निकटता और रणनीतिक साझेदारी को एक बार फिर रेखांकित किया।