नई दिल्ली/न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र (UN) में इस्लामोफोबिया विरोधी दिवस पर आयोजित महासभा में भारत ने धार्मिक असहिष्णुता और नफरत के खिलाफ स्पष्ट रुख अपनाते हुए पड़ोसी देश पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। भारत ने कहा कि कुछ देशों ने इस्लामोफोबिया के नाम पर मनगढ़ंत कथाएं रची हैं, जबकि उनके ही देश में अहमदिया समुदाय के साथ लगातार दमन और अफगानों पर हिंसक कार्रवाई की जा रही है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा, “हम किसी भी धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा और नफरत की कड़ी निंदा करते हैं। भारत एक ऐसा देश है जहां दुनिया के लगभग सभी बड़े धर्मों के अनुयायी शांति से रहते हैं। हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और सिख धर्म जैसी धर्म-परंपराओं के जन्मदाता के रूप में भारत धार्मिक भेदभाव के प्रति संवेदनशील और जागरूक है।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत का संविधान और उसकी धर्मनिरपेक्षता, ‘सर्व धर्म समभाव’ के दर्शन पर आधारित है, जिसका अर्थ है सभी धर्मों के प्रति समान आदर। धर्म का राजनीतिकरण कभी समाधान नहीं देता, बल्कि विभाजन और चुनिंदा नफरत को बढ़ावा देता है। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को धर्म, संस्कृति और राजनीति से परे रहकर निष्पक्ष रूप से काम करना चाहिए।”
वैश्विक स्तर पर धर्म-भय पर सतर्कता
हरीश ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धार्मिक पहचान को राजनीतिक या सैन्य हित के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल न किया जाए। उन्होंने कहा, “कुछ पड़ोसी देशों के उदाहरण दिखाते हैं कि धर्म के नाम पर भेदभाव और हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। अफगानों पर हवाई हमले और रमजान में हिंसक कार्रवाई इसी का उदाहरण हैं।”
भारत ने इस अवसर पर यह भी कहा कि देश में 20 करोड़ से अधिक मुसलमान शांतिपूर्वक रहते हैं और अपने प्रतिनिधि खुद चुनते हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह धर्मनिरपेक्षता, समानता और मानवीय गरिमा के सिद्धांतों पर आधारित समाज बनाने में अपनी भूमिका मजबूत बनाए।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने उठाई चेतावनी
UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि विश्वभर में मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव और पूर्वाग्रह बढ़ रहे हैं, जो सामाजिक एकता और मानवाधिकारों के लिए खतरा हैं। उन्होंने इस्लामोफोबिया और धार्मिक भेदभाव को समाप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।