तेहरान। ईरान में पिछले 15 दिनों से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी हैं। ये प्रदर्शन राजधानी तेहरान से लेकर देश के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। आर्थिक कठिनाइयों और महंगाई के खिलाफ शुरू हुए ये आंदोलन अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व पर केंद्रित हो गए हैं।
हालांकि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दावा किया है कि देश में हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। उन्होंने हिंसा के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराया, हालांकि इसके कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए।
अमेरिका और ट्रंप पर आरोप
अराघची ने कहा कि अमेरिका और विशेषकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रदर्शन को हिंसक और खूनी बनाने में भूमिका निभा रहे हैं ताकि अमेरिकी हस्तक्षेप का बहाना मिल सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि विदेशियों के हस्तक्षेप को रोकना ईरानी सरकार की प्राथमिकता है।
मृतकों और गिरफ्तारी के आंकड़े
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 544 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इसके अलावा 10,681 से अधिक लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। देशभर में 186 शहरों और 585 स्थानों पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
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28 दिसंबर को महंगाई और आर्थिक कठिनाइयों के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ।
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7 जनवरी के बाद ईराक में नए सिरे से आंदोलन तेज हुआ।
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प्रदर्शनकारियों ने रेजा पहलवी और खामेनेई सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
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हिंसा और प्रदर्शनों के बीच, देश में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दी गईं।
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अमेरिका ने इस बीच ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दी।
ईरानी विदेश मंत्री ने कतर आधारित अल जजीरा चैनल के माध्यम से कहा कि हिंसक घटनाओं के पीछे विदेशों की साजिश है और सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में सफल रही है।
देश और विदेश दोनों में इस मामले पर नजर बनी हुई है, क्योंकि विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे हैं और हालात में स्थिरता अभी स्पष्ट नहीं है।