अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की कथित मध्यस्थ भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस्लामाबाद ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर ठहराने की अनुमति दी थी, जिससे उन्हें संभावित अमेरिकी हमलों से बचाया जा सके।
सीबीएस न्यूज ने सोमवार को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि कुछ ईरानी विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर पार्क किए गए थे। यह घटनाक्रम उस समय का बताया जा रहा है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर था और हाल ही में सीजफायर की घोषणा हुई थी।
अफगानिस्तान को लेकर भी दावे
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान ने अपने कुछ विमान अफगानिस्तान में भी उतारे थे, हालांकि इनमें सैन्य विमान शामिल थे या नहीं, इस पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर यह दावा किया।
वहीं अफगानिस्तान के सिविल एविएशन अधिकारियों ने कहा कि संघर्ष से ठीक पहले एक ईरानी सिविल विमान काबुल में उतरा था, लेकिन तालिबान प्रवक्ता ने अफगानिस्तान में किसी भी ईरानी सैन्य या अन्य विमानों की मौजूदगी से इनकार किया है।
पाकिस्तान ने आरोपों को नकारा
इन रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सभी दावों को गलत और निराधार बताया है।
अमेरिकी राजनीति में भी हलचल
इस बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो अमेरिका, ईरान और अन्य देशों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के रक्षा अधिकारियों के पिछले बयानों को देखते हुए यदि यह रिपोर्ट सही निकली, तो यह आश्चर्यजनक नहीं होगा।