गाजा पट्टी को खाली कराने के सुझाव पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप को करारा झटका लगा है। अरब देशों ने फलस्तीनियों को गाजा से मिस्र और जॉर्डन में स्थानांतरित करने के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सुझाव को खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि छह दिन पहले इस्राइल हमास में संघर्षविराम के बीच ट्रंप ने यह सुझाव दिया था। उन्होंने उन्होंने गाजा पट्टी को खाली कराने की बात कही थी। साथ ही मिस्र और जॉर्डन से गाजा पट्टी के लोगों को अपने यहां पनाह देने का भी आग्रह किया था।
ट्रंप के सुझाव पर क्या बोले अरब देश
मिस्र, जॉर्डन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, फलस्तीनी प्राधिकरण और अरब लीग ने शनिवार को विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि वे फलस्तीनियों को गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में उनके क्षेत्रों से बाहर ले जाने की किसी भी योजना को खारिज करते हैं। इसके साथ ही बयान में अरब देशों ने चेतावनी भी दी है। इन देशों ने कहा कि ऐसी योजनाएं क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डालती हैं। इतना ही नहीं यह संघर्ष बढ़ने का खतरा भी पैदा करती हैं और लोगों के बीच शांति और सह-अस्तित्व की संभावनाओं को कमजोर करती हैं।
क्या था ट्रंप का प्लान
गौरतलब है कि बीते शनिवार को ट्रंप ने कहा था कि वह दोनों अरब देशों के नेताओं से गाजा के लोगों को अपने देश में शरण देने का आग्रह करेंगे, ताकि गाजा में फिर से परिस्थिति को सुधारा जा सके। उन्होंने कहा था कि गाजा की आबादी का पुनर्वास "अस्थायी या दीर्घकालिक हो सकता है। इस्राइल के 15 महीने के सैन्य अभियान के चलते इस समय गाजा पूरी तरह से विश्वंस स्थल में तब्दील हो चुका है। ट्रंप ने कहा था कि मैं कुछ अरब देशों के साथ जुड़ना चाहता हूं और एक अलग स्थान पर आवास बनाना चाहता हूं, जहां वे बदलाव के लिए शांति से रह सकें।
गाजा पट्टी क्या है?
यह करीब 365 वर्ग किलोमीटर का एक छोटा सा क्षेत्र है। इसके एक ओर भूमध्य सागर। बाकी तीन ओर से इसकी सीमाएं इस्राइल और मिस्र से लगी हुई हैं। इसकी उत्तरपूर्वी और दक्षिणपूर्वी सीमा की तरफ इजरायली क्षेत्र है। वहीं, दक्षिण पश्चिम में गाजा पट्टी की सीमा मिस्र से लगती है। इसके पश्चिम में भूमध्य सागर है।
इस्राइल और हमास के बीच संघर्ष का केंद्र गाजा पट्टी ही रहा है। यह दो फलस्तीनी क्षेत्रों में से एक है। गाजा पट्टी के अलावा वेस्ट बैंक दूसरा फलस्तीनी क्षेत्र है, जिसके अधिकांश हिस्से पर इस्राइल का कब्जा है।