चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पश्चिम एशिया में तुरंत शांति स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए अमेरिका की हालिया कार्रवाइयों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अशांति अमेरिका के साथ चीन के स्थिर संबंधों को प्रभावित नहीं करेगी।
राष्ट्रीय जनसमूह कांग्रेस के सत्र में वार्षिक उच्चस्तरीय ब्रीफिंग के दौरान वांग ने स्पष्ट किया कि “शक्ति का अर्थ हमेशा सही नहीं होता” और ईरान पर अमेरिकी हमलों की निंदा की। उन्होंने कहा, “यह युद्ध कभी नहीं होना चाहिए था और किसी के हित में नहीं है। रंगीन क्रांतियों या शासन परिवर्तन की साजिश को जनता का समर्थन नहीं मिलेगा।” बीजिंग में पत्रकारों से बात करते हुए वांग ने जोर देकर कहा कि दुनिया को ‘जंगल का कानून’ अपनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और सभी सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकना चाहिए।
ट्रंप और शी जिनपिंग की शिखर बैठक की तैयारी
वांग यी के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में शिखर बैठक की योजना है। पिछले साल हुए एक वर्षीय व्यापार समझौते के बाद द्विपक्षीय संबंध स्थिर बने हुए हैं, लेकिन ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर सुप्रीम कोर्ट की चुनौती और मध्य पूर्व में बढ़ती अशांति ने अनिश्चितता पैदा की है।
वांग ने कहा कि दोनों देशों को जोखिम प्रबंधन करना चाहिए और अनावश्यक व्यवधानों से बचना चाहिए। उनका मानना है कि पारस्परिक ईमानदारी और सहयोग से 2026 चीन-अमेरिका संबंधों के लिए स्थिर और सतत विकास का मील का पत्थर बन सकता है। शिखर बैठक की तैयारी के लिए अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर और चीन के उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग अगले सप्ताह पेरिस में मुलाकात कर सकते हैं, जिससे नए समझौते और व्यापारिक सौदों की नींव रखी जा सके।
भारत-चीन सहयोग से ग्लोबल साउथ में नई उम्मीद
वांग यी ने भारत और चीन के बीच सहयोग बढ़ाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अगले दो वर्षों में BRICS की अध्यक्षता में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। वांग के अनुसार, एशियाई महाशक्तियों का संयुक्त नेतृत्व वैश्विक स्तर पर विकासशील देशों के लिए स्थिरता और नई उम्मीदें ला सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिलकर दोनों देश ग्लोबल साउथ में नई दिशा दे सकते हैं।
ट्रंप का दावा: ईरान पर सैन्य कार्रवाई
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि अमेरिका ने ईरानी नौसेना, वायुसेना और मिसाइल क्षमताओं को निशाना बनाया है। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश सैन्य नेतृत्व प्रभावित हुआ है और मिसाइल व ड्रोन क्षमताओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। ट्रंप ने कहा, “ईरानी सेना लगभग अस्तित्वहीन है। हम चाहें तो और प्रभाव डाल सकते हैं, लेकिन फिलहाल कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के ‘बुरे साम्राज्य’ को समाप्त कर दिया है और युद्ध अभी अपने चरम स्तर पर है।