कनाडा की सुरक्षा खुफिया एजेंसी CSIS (Canadian Security Intelligence Service) ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें पहली बार स्पष्ट रूप से माना गया है कि खालिस्तानी चरमपंथी गतिविधियां कनाडा की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। रिपोर्ट को कनाडा की संसद में पेश किया गया।

खालिस्तानी गतिविधियों पर चिंता

रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में सक्रिय कुछ खालिस्तानी समर्थक तत्व हिंसक चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, ऐसे समूह राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ लोग कनाडाई संस्थाओं और संसाधनों का उपयोग कर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें फंड जुटाना और समुदाय के लोगों को प्रभावित करना भी शामिल बताया गया है।

एयर इंडिया फ्लाइट 182 हमले का जिक्र

CSIS ने अपनी रिपोर्ट में एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके की 40वीं बरसी का भी जिक्र किया। यह घटना 1985 में हुई थी, जिसमें 329 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में अधिकांश कनाडाई नागरिक थे। इसे कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला माना जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान कनाडा में खालिस्तानी समूहों से जुड़ी किसी हिंसक घटना की पुष्टि नहीं हुई।

कई देशों पर हस्तक्षेप के आरोप

खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन, रूस, भारत, ईरान, पाकिस्तान और कुछ अन्य देश कनाडा की राजनीतिक व्यवस्था में प्रभाव डालने की कोशिश करते रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि भारत ने कनाडा के कुछ नेताओं, पत्रकारों और भारतीय मूल के लोगों से संपर्क बनाए, जिससे सीमा पार दबाव या निगरानी जैसी गतिविधियों की आशंका बनी। हालांकि रिपोर्ट में यह भी माना गया कि भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनमें खालिस्तान अलगाववाद भी शामिल है।

कनाडा में खालिस्तान समर्थन कानूनी

रिपोर्ट में कहा गया है कि कनाडा में खालिस्तान के समर्थन को राजनीतिक अभिव्यक्ति के रूप में कानूनी मान्यता प्राप्त है। हालांकि, यदि कोई गतिविधि हिंसा या चरमपंथ से जुड़ती है तो उस पर नजर रखना जरूरी है।

भारत-कनाडा रिश्तों में नरमी के संकेत

यह रिपोर्ट 2025 के खुफिया आकलन पर आधारित है, लेकिन हाल के महीनों में भारत और कनाडा के संबंधों में सुधार के संकेत भी मिले हैं। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के कार्यभार संभालने के बाद कनाडाई अधिकारियों ने कहा है कि फिलहाल भारत से कनाडा की धरती पर किसी प्रत्यक्ष हिंसक खतरे के संकेत नहीं हैं।

रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) प्रमुख माइक ड्यूहेम ने भी कहा कि किसी विदेशी एजेंट से सीधा खतरा साबित नहीं हुआ है।

निज्जर विवाद के बाद बढ़ा था तनाव

भारत और कनाडा के रिश्ते हाल के वर्षों में काफी तनावपूर्ण रहे हैं। खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने भारत सरकार के एजेंटों पर संलिप्तता के आरोप लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें राजनीतिक बताया था।

अब नई रिपोर्ट के बाद कनाडा के भीतर खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर बहस फिर तेज हो सकती है।