नई दिल्ली/बीजिंग। अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी व्यापार तनाव के बीच एक बड़ी डील सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चीन ने बोइंग कंपनी के 200 वाणिज्यिक विमान खरीदने पर सहमति जताई है। हालांकि, इस समझौते से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। उन्होंने कहा, “आज जिस बात पर सहमति बनी है, वह यह है कि चीन 200 बड़े बोइंग विमान ऑर्डर करेगा।”
इस बयान के सामने आने के बाद बोइंग के शेयरों में लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
कौन से विमान शामिल हैं, स्पष्ट नहीं
रिपोर्ट्स के अनुसार यह अभी साफ नहीं है कि चीन बोइंग के कौन से मॉडल 737 मैक्स, 777X या 787 ड्रीमलाइनर की खरीद करेगा। जानकारी के मुताबिक बोइंग के सीईओ केली ऑर्टबर्ग और GE एयरोस्पेस के प्रमुख लैरी कल्प भी ट्रंप के चीन दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
उम्मीद से कम बड़ा ऑर्डर
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका को चीन से इससे कहीं बड़े ऑर्डर की उम्मीद थी। बताया जा रहा है कि चर्चाओं में करीब 500 विमानों तक के सौदे की संभावना जताई गई थी, जबकि 200 जेट का मौजूदा समझौता अपेक्षाकृत छोटा माना जा रहा है।
गौरतलब है कि 2017 में भी चीन ने ट्रंप के दौरे के दौरान लगभग 300 बोइंग विमानों की खरीद पर सहमति जताई थी।
एयरबस की बढ़त और बोइंग की चुनौती
अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और तकनीकी विवादों के चलते बोइंग की चीनी बाजार में हिस्सेदारी कमजोर हुई है, जबकि यूरोपीय कंपनी एयरबस ने इस दौरान अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। एयरबस ने पहले ही चीन में असेंबली लाइन स्थापित कर वहां अपनी उपस्थिति बढ़ाई है।
चीन का विशाल विमानन बाजार
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन का विमानन बाजार दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है। अनुमान है कि 2045 तक चीन को करीब 9,000 नए विमानों की जरूरत होगी, जिससे यह वैश्विक विमानन कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार बना रहेगा।
व्यापार और राजनीति का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल व्यावसायिक नहीं बल्कि अमेरिका-चीन संबंधों में संतुलन बनाने की कोशिश का हिस्सा भी हो सकती है। हालांकि, दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव का असर अब भी विमानन उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है।