वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच हालात में नरमी के संकेत दिखाई देने लगे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते की घोषणा के बाद सामने आया है, जिससे क्षेत्र में युद्धविराम की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

ट्रंप के अनुसार, अमेरिका और ईरान शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम क्षेत्रीय संघर्ष को कम करने और समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है। हालांकि अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर होने तक ईरानी बंदरगाहों के आसपास लागू नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी।

होर्मुज मार्ग से फिर गुजरने लगे तेल टैंकर

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी कि तेल लेकर जा रहे कई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित तरीके से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जहाज ओमान के समुद्री क्षेत्र से होकर निर्धारित समुद्री मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह रास्ता फिलहाल सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित हो रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। शुरुआती समझौते में केवल समुद्री मार्ग खोलने और नाकेबंदी में ढील देने पर सहमति बनी है, जबकि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर आगे अलग दौर की बातचीत होगी।

समुद्री सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती

हालांकि जहाजों की आवाजाही शुरू होने से राहत मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लगेगा। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, जलमार्ग में संभावित बारूदी सुरंगों और अन्य खतरों को हटाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। इनकी सफाई में कई सप्ताह लग सकते हैं, जिसके बाद ही बीमा कंपनियां पूर्ण सुरक्षा कवरेज देने को तैयार होंगी।

अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संगठनों के अनुसार, हालिया तनाव के चलते सैकड़ों जहाज इस मार्ग पर प्रभावित हुए हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र से जुड़े समुद्री निकायों ने भी संघर्ष के दौरान कई सुरक्षा घटनाओं की पुष्टि की है।

टोल शुल्क को लेकर मतभेद बरकरार

समझौते के बावजूद कुछ मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी प्रशासन चाहता है कि यह समुद्री मार्ग बिना अतिरिक्त शुल्क के सभी देशों के लिए खुला रहे। वहीं ईरान ने संकेत दिया है कि जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क संबंधी नीति को लेकर उसका अलग दृष्टिकोण है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ताओं में इसी तरह के आर्थिक और रणनीतिक मुद्दे प्रमुख रहेंगे। फिलहाल वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार क्षेत्र की निगाहें शुक्रवार को प्रस्तावित समझौते और उसके बाद की घटनाओं पर टिकी हुई हैं।