अमेरिका में व्यापार नीति को लेकर सियासी तापमान फिर बढ़ गया है। हाल ही में अदालत से झटका मिलने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वह धारा 122 के तहत नया कार्यकारी आदेश जारी करेंगे और यह शुल्क पहले से लागू दरों के ऊपर जोड़ा जाएगा।

राष्ट्रपति के अनुसार, प्रशासन धारा 301 समेत अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कई जांच प्रक्रियाएं भी शुरू करेगा। उनका तर्क है कि इन कदमों से अमेरिकी उद्योगों को उन देशों और कंपनियों से सुरक्षा मिलेगी, जिन पर अनुचित व्यापार व्यवहार के आरोप हैं।

‘अमेरिका फर्स्ट’ पर जोर

ट्रंप ने दोहराया कि उनकी प्राथमिकता घरेलू उद्योग और कामगारों की सुरक्षा है। उनका कहना है कि सख्त टैरिफ नीति अमेरिका की आर्थिक मजबूती का अहम साधन है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि किसी फैसले से एक रास्ता बंद होता है, तो प्रशासन के पास अन्य कानूनी विकल्प मौजूद हैं।

इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को उनके व्यापक वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक ठहराया था। अदालत के इस निर्णय को ट्रंप की आर्थिक रणनीति के लिए बड़ा झटका माना गया। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी दलीलों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और यह निर्णय निराशाजनक है। उन्होंने कुछ न्यायाधीशों के रुख पर भी सवाल उठाए।

टैरिफ को लेकर यह टकराव आने वाले समय में अमेरिका की राजनीति और वैश्विक व्यापार संबंधों दोनों पर असर डाल सकता है।