नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत (ट्रांजिट बेल) की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है, जिस पर उनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज किया गया है।
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने उनकी याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया, जिसके बाद कोर्ट में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस फैसले पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “क्या अदालत मुझे मंगलवार तक सुरक्षा नहीं दे सकती… क्या मैं कोई आतंकवादी हूं?”
सुनवाई के दौरान सिंघवी ने यह भी कहा कि वे सोमवार को याचिका दाखिल कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें इतनी जल्दबाजी में राहत से वंचित करना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें किसी गंभीर अपराधी की तरह देखा जा रहा है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि पवन खेड़ा को इस मामले में राहत के लिए गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करनी होगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हाई कोर्ट इस मामले की सुनवाई स्वतंत्र रूप से करे और सुप्रीम कोर्ट की किसी भी पूर्व टिप्पणी से प्रभावित न हो।
पीठ ने स्पष्ट किया कि असम की अदालत इस याचिका पर उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र निर्णय लेगी।
सुनवाई के दौरान यह भी तर्क रखा गया कि तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 अप्रैल को लगाई गई रोक दस्तावेजों को लेकर हुई कथित गलतफहमी पर आधारित थी। वरिष्ठ वकील सिंघवी ने कहा कि दस्तावेज जमा करने में जल्दबाजी के कारण कुछ त्रुटि हुई थी, जिसे बाद में अतिरिक्त दस्तावेजों के जरिए स्पष्ट कर दिया गया।
पवन खेड़ा ने अपनी याचिका में ट्रांजिट बेल की अवधि मंगलवार तक बढ़ाने की मांग की थी, यह दलील देते हुए कि असम की अदालतें फिलहाल बंद हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और उन्हें बिना देरी के संबंधित हाई कोर्ट में जाने का निर्देश दिया।