बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने के दौरान दोनों दलों ने अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के हितों की अनदेखी की, जबकि अब महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर इन वर्गों की बात कर रहे हैं।

मायावती ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस का रवैया समय-समय पर बदलता रहा है और वह एससी-एसटी व ओबीसी समाज के अधिकारों को लेकर कभी गंभीर नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने महिला आरक्षण के संदर्भ में भी इन वर्गों के लिए आरक्षित कोटे को लागू कराने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

उन्होंने यह भी कहा कि ओबीसी आरक्षण को लागू कराने में मंडल आयोग की सिफारिशों को अमल में लाने का श्रेय तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार को जाता है, जिसमें बसपा के प्रयासों की भूमिका भी रही।

सपा पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि पिछड़े मुस्लिम समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने की रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश में उस समय की सरकार ने लंबे समय तक लंबित रखा, जिसे बाद में बसपा सरकार ने लागू किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सत्ता में रहते समय एक अलग रवैया अपनाती है, जबकि सत्ता से बाहर होने पर उसका रुख बदल जाता है। मायावती ने इसे “दोहरे चरित्र” की राजनीति बताया और लोगों से ऐसी पार्टियों से सतर्क रहने की अपील की।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे लागू करने में परिसीमन जैसी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं और यदि इसे लागू किया जा रहा है तो मौजूदा जनगणना के आधार पर ही किया जाएगा।

अपने बयान के अंत में उन्होंने कहा कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के वास्तविक हितों को लेकर राजनीतिक दलों की गंभीरता अक्सर सवालों के घेरे में रहती है। उन्होंने इन वर्गों से आत्मनिर्भर बनने और किसी भी राजनीतिक भ्रम से बचने की सलाह भी दी।