लोकसभा में आज बजट 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों को छुआ। भाषण की शुरुआत उन्होंने मार्शल आर्ट्स के उदाहरण से की। राहुल ने कहा कि जिजित्सु में पकड़ स्पष्ट दिखाई देती है, लेकिन राजनीति में यह नहीं दिखती। “कहाँ दबाव पड़ रहा है, कहाँ चोक लग रहा है, यह राजनीति में नजर नहीं आता,” उन्होंने कहा। इसके बाद उन्होंने बजट, अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते और वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य पर अपने विचार रखे।
राहुल गांधी ने आम बजट और वित्त मंत्रालय की आर्थिक सर्वे की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि दुनिया आज भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा- वित्त हथियारबंदी की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि रूस और चीन अब अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती दे रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम स्थिरता की दुनिया से अस्थिरता की दुनिया में बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पहले कहा था कि युद्ध का समय समाप्त हो चुका है, लेकिन यूक्रेन और ईरान में संघर्ष जारी हैं। हमारे सामने चुनौतियां अब पूरी तरह बदल चुकी हैं।”
राहुल ने एआई और डेटा के महत्व पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि भारत के पास 1.4 अरब लोगों का डेटा है, जो वैश्विक एआई युग में हमारी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, “एआई पेट्रोल के बिना कोई काम नहीं करता और हमारे पास यह पेट्रोल, यानी डेटा, मौजूद है। यही कारण है कि हम इस डिजिटल युग में मजबूत स्थिति में हैं।”
उन्होंने बजट की आलोचना करते हुए कहा कि यह देश की मौजूदा चुनौतियों किसानों, ऊर्जा और डेटा सुरक्षा को पर्याप्त ध्यान नहीं देता। बजट केवल औपचारिकताओं तक सीमित है और असल समस्याओं का समाधान इसमें नहीं है।
राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते पर भी तीखा हमला किया। उनका कहना था कि भारत का डेटा और ऊर्जा सुरक्षा अब अमेरिका के नियंत्रण में चला गया है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी टैरिफ नीति के कारण भारतीय कपड़ा और ऊर्जा उद्योग प्रभावित हो रहे हैं और देश की निर्णय प्रक्रिया पर अमेरिका का प्रभाव बढ़ गया है।
उन्होंने आगे कहा, “पहले बढ़ती आबादी बोझ मानी जाती थी, लेकिन अब यही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है। डेटा और ऊर्जा के मामले में हमें अपने लोगों की ताकत को पहचानना होगा। लेकिन इस समझौते के तहत हम खुद को कमजोर स्थिति में डाल रहे हैं।”
राहुल ने अनिल अंबानी और एपस्टीन फाइल्स का भी जिक्र करते हुए कहा कि देश की रक्षा और व्यापार हितों में गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी स्थिति केवल प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत कदम नहीं, बल्कि 1.5 अरब भारतीयों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
अंत में राहुल ने सदन को बताया कि उनके पास सभी आरोपों के दस्तावेज मौजूद हैं और वह उन्हें सत्यापित करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि इस समझौते ने भारत के डेटा, किसानों, सॉफ्टवेयर उद्योग, ऊर्जा और सुरक्षा हितों को प्रभावित किया है।