नई दिल्ली। कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाओं के बीच तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से संसद भवन में मुलाकात की। यह बैठक करीब आधे घंटे चली। सूत्रों के मुताबिक, थरूर ने खुद राहुल गांधी और खरगे से मिलने का समय मांगा था ताकि वे अपनी बात और चिंताएं सीधे नेतृत्व के सामने रख सकें। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले पार्टी नेतृत्व इन मतभेदों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
बताया जाता है कि पिछले साल अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले के बाद हालात बिगड़ने लगे। उस समय शशि थरूर ने संकट से निपटने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तरीके की सराहना की थी, जिसे कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी लाइन के खिलाफ माना। इसके बाद पार्टी के भीतर उन्हें लेकर असहजता बढ़ती चली गई और कुछ नेताओं ने तंज कसते हुए उन्हें भाजपा के करीब जाने वाला भी बताया।
पीएम की तारीफ बनी विवाद की वजह
नवंबर में विवाद और गहराया, जब थरूर एक निजी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के भाषण को सुनने पहुंचे और बाद में सोशल मीडिया पर उसकी तारीफ करते हुए उसे आर्थिक सोच और सांस्कृतिक बदलाव की प्रेरणा बताया। इस टिप्पणी पर कांग्रेस प्रवक्ताओं सुप्रिया श्रीनेत और संदीप दीक्षित ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और उनके बयान पर सवाल खड़े किए।
लेख ने बढ़ाई दूरी
इसी महीने थरूर का एक लेख भी पार्टी को नागवार गुजरा, जिसमें भारतीय राजनीति में ‘परिवारवाद’ पर टिप्पणी की गई थी। कांग्रेस जैसी पारिवारिक पृष्ठभूमि वाली पार्टियों पर की गई यह टिप्पणी नेतृत्व को रास नहीं आई और इससे उनके और पार्टी के बीच दूरी और साफ नजर आने लगी।